कविता – 21 अमन को हैं बेचते … जो राज पद को प्राप्त कर प्रजा का हित चिंतन करे। योग्य राजा है वही जो परकल्याण हित जीवन धरे ।। जो राग व अनुराग से सर्वथा और पूर्णतया मुक्त हो । राजा उसी को मानिये जो न्याय विवेक युक्त हो ।। राजा वही है जो कभी […]
अमन को हैं बेचते …