आभा का रथ भारत ही, प्रकाश पुंज जगती भर का। प्रकाश किरण बिखराता है, करता दूर अंधेरा जग का।। ऋणी है वसुधा भारत की, सिरमौर समझती है अपना। इस धर्मस्थली से होता आया, साकार जगत का हर सपना।। धर्म प्रेमी और महीपति , सम्राट हुए महीपाल हुए। इस धर्म धरा भारत भू- पर, न जाने […]
ऋणी है वसुधा भारत की