64 काम कामना हैं बुरे, कह गए संत फकीर। कामना मारे है हमें, काम के मारें तीर।। काम के मारें तीर, करें घायल गहरा। आंखों से कर देते अंधा, कानों से बहरा।। जैसे ही दिखे मेनका, जागृत होता काम। बड़े बड़ों को आसन से पटका करता काम ।। 65 त्रिया की संगत करे, वही काम […]
कुंडलियां … 20 जिसने मारा काम को…….