94 धोखे और फरेब से, करै जो भ्रष्टाचार। नेता उसको मानिए, करै जो अत्याचार।। करै जो अत्याचार ,तिजोरी धन से भरता। जनता का पीवे खून,दया जरा ना करता।। नेता नाटककार है पूरा ,बात करे रो-रोके। नेता तो उसको कहते,भरे हृदय में धोखे।। 95 देश की चिंता है नहीं, करें देश की बात। मां की खींचें […]
कुंडलियां … 32 …..कैसे जननायक हैं ?