157 धन पैरों की धूल है, जोबन नदी समान । आयु को ऋषि ने कहा, बहत हुआ जल मान।। बहत हुआ जल मान, मूरख पीछे पछतावे।। देख बुढापा रोवत है, समय से धोखा खावे। पड़त शोक की अग्नि में , करता रोज रुदन । निकल जा हाथ से , तब काम ना आवे धन।। 158 […]
अध्याय … 53 वेद पढ़े और शास्त्र भी……