स्वामी ओमानन्द सरस्वती भारत के पतनकाल के समय आज से दो सो वर्ष पूर्व भी हरयाणा स्वर्ग के समान ही था । इसकी वैदिकसंस्कृति ज्यों की त्यों अविकृतरूप में थी । केवल पौराणिक प्रभाव के कारण तीर्थ , मूर्तिपूजादि का प्रचलन होगया था । वही अश्वपति के काल का पवित्र चरित्र , शुद्ध , सात्त्विक […]