रसना हरि को नाम ले, मत करना प्रमाद। अनहद – चक्र मे बजे, सुन अनहद का नाद॥ 1469॥ व्याख्या:- मनुष्य प्रकृति में परमपिता परमात्मा की उत्कृष्टतम रचना है।चौरासी लाख योनियों में केवल मनुष्य को ही प्रभु ने ऐसी रसना का अमोघ उपहार दिया है,जिससे वह संवाद के साथ-साथ भगवान की भक्ति भी कर सकता […]
रसना हरि को नाम ले, मत करना प्रमाद