बिखरे मोती देह का सार है आत्मा, सृष्टि का है ब्रह्म। जान सके तो जान ले, इनमें आनन्दम्॥1496॥ व्याख्या:- पाठकों को यहां यह बता देना प्रासंगिक रहेगा कि जीवात्मा तथा ब्रह्म यह दोनों प्रज्ञ है अर्थात् ज्ञान वाले हैं,चेतना वाले हैं,जबकि शरीर तथा प्रकृति प्राज्ञ है अर्थात् ज्ञान वाले नहीं है,चेतना वाले नही है किन्तु […]