प्रेरक तेरा ओ३म् है , रक्षक सर्वाधार । नित चरणौं में बैठके, निज प्रतिबिम्ब निहार॥2091॥ भाव की उत्कृष्टतम्ब निकृष्टतम्ब अव्यवस्था के संदर्भ में – भाव की ऊंची है गति, भक्ति में हो लीन । क्रोध और अहंकार में, उठते भाव मलीन॥2092॥ जीव ईश्वर का अंश है पुराण – पुरुष का अंशु तू , मत भूले […]
बिखरे मोती : आत्मस्वरूप के संदर्भ में