आसक्ति-अहंकार को, जिसने लिया जीत । उद्वेगों से दूर मन, हो गया त्रिगुणातीत॥2708॥ तत्त्वार्थ :- यह दृश्यमान प्रकृति परम पिता परमात्मा की सुन्दरतम रचना है। ‘प्र’ से अभिप्राय प्रमुख, विशिष्ट अर्थात् सुन्दरतम और कृति से अभिप्राय है रचना यानि कि परम पिता परमात्मा की सुन्दर रचना,यदि आप प्रकृति तात्विक विवेचन करेंगे तो पायेंगे यह […]