तनवीर जाफऱी हमारे देश की लगभग सभी सरकारें व सभी राजनैतिक दलों के नेता प्राय: गला फाड़-फाड़ कर यह चीख़ते-चिल्लाते दिखाई देते हैं कि ‘हमारे देश के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए तथा सभी को शिक्षा का समान अधिकार होना चाहिए’। परंतु ऐसी लोकलुभावनी बातें करने वाले देश के किसी भी नेता […]
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शिक्षा में सामाजिक न्याय की पहल
प्रमोद भार्गव सरकारी शिक्षा में सुधार के तमाम प्रयोगों की असफलता के तारतंभ में इलाहाबाद उच्चन्यायालय का शिक्षा में बुनियादी सुधार से संबंधी अहम् फैसला आया है। बशर्तें इसे बहाने बनाकर टाला न जाए। शिव कुमार पाठक द्वारा दायर जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दो टूक […]
मनमोहन सिंह आर्य महर्षि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) ने प्रज्ञाचक्षु दण्डी गुरू स्वामी विरजानन्द सरस्वती, मथुरा से वैदिक आर्ष व्याकरण एवं वैदिक शास्त्रों का अध्ययन कर देश व संसार से अविद्या हटाने के लिए ईश्वरीय ज्ञान वेदों का प्रचार किया। उनके वेद प्रचार आन्दोलन का देश और समाज पर ही नहीं अपितु विश्व पर व्यापक प्रभाव […]
कहा जाता है कि विकास केवल स्वतंत्र और पारदर्शी माहौल में ही संभव है। शैक्षिक और अकादमिक जगत के लिए भी यह सच है। शैक्षिक जगत में स्वतंत्रता और पारदर्शिता को केवल तभी कायम रखा जा सकता है, जब महत्वपूर्ण पदों पर चयन और नियुक्तियों में केवल और केवल योग्यता का खयाल रखा जाए और […]
धन की सनक से ध्वस्त होती शिक्षा
प्रो. एनके सिंह एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं पहले यह परंपरा थी कि शिक्षण संस्थाओं का नेतृत्व पेशेवर लोग करते थे। यदि व्यापारी इसमें निवेश भी करता था तो निवेश के बाद इसका प्रशासन और अकादमिक निर्णय लेने का अधिकार योग्य और पेशेवर लोगों को सौंप दिया जाता था। इसी के साथ […]
शिक्षा अधिकार कानून के पांच साल
जावेद अनीस इस अप्रेल में शिक्षा अधिकार कानून लागू हुए पांच साल पूरे हो चुके हैं, एक अप्रैल 2010 को शिक्षा का अधिकार कानून 2009 पूरे देश में लागू किया गया था इसी के साथ ही भारत उन देशों की जमात में शामिल हो गया था जो अपने देश के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध […]
बनवारी पिछली एक शताब्दी में अंगरेजी शिक्षा ने हमें जितना नियंत्रित किया है, उतना बीसवीं सदी के पूर्वार्ध तक चला ब्रिटिश राज भी नहीं कर पाया था। अंगरेजी शिक्षा ने हमें अपनी सभ्यता के मूल मार्ग से भटका दिया है और उसने हमसे अपने पिछले इतिहास को समझने की दृष्टि छीन ली है। हमारे इतिहास […]
चिकित्सा शिक्षा में शामिल होगा योग
प्रमोद भार्गव भारत की गुलामी और उससे मुक्ति के बाद शायद यह पहला अवसर है,जब पश्चिमी जगत के ज्ञान की खिडक़ी पूरब के ज्ञान से खुलने जा रही है। वह भी ज्ञान के ऐसे क्षेत्र में जिसे केवल और केवल अंग्रेजी में ही संभव माना जाता रहा है। जी हां,चिकित्सा क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय मानक संस्था […]
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्कूलों के पाठ्यक्रम में 25 फीसदी हिस्सा योग, संगीत और खेल के लिए नियत किया है। इस एक निर्णय के दूरगामी परिणाम आएंगे। हमारे बच्चों को स्कूलों से ही अपने देश और संस्कृति के विषय में सीखने समझने को तो कुछ मिलेगा […]
कभी कहावत थी कि-‘पढ़े फारसी बेचे तेल।’ यह उस समय की बात है जब देश पर मुगलों का शासन था। उस समय फारसी पढ़े लिखे व्यक्ति को बेरोजगार नही रहना पड़ता था, पर यदि फारसी पढक़र भी कोई व्यक्ति बेरोजगार रह जाता था, अपने परंपरागत व्यवसाय (तेल बेचना आदि) में ही लगा रह जाता था […]