हिमाचल राजभवन में राष्ट्रनीति की गूंजहमारा मानना है कि भारत को ‘विश्वगुरू’ बनाने का हमारा संवैधानिक लक्ष्य तभी पूर्ण हो सकता है जबकि हमारे राजभवनों में तपे हुए संत प्रकृति के और दार्शनिक बुद्घि के राजनेता विराजमान होंगे। राजभवनों में यदि निकृष्ट चिंतन के लोगों को भेजा जाएगा तो उनसे भारतीयता का भला होने वाला […]
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एस. सी. जैन अब हम देखें कि मनू द्वारा तैयार की गयी स्मृति और अंग्रेजों द्वारा तैयार की गयी स्मृति में जमीन आसमान का अंतर है। अंग्रेज द्वारा हमारे ग्रंथों व साहित्य में से कुछ वाक्य को निकाल कर रिकॉर्ड कर दिया जाता है कि भारत वासी गाय का मांस खाते हैं। यह सब बाहर […]
भारत के विषय में मि. कोलमैन ने कहा है कि भारत के साधु संतों एवं कवियों ने नैतिक नियमों की शिक्षा दी, और इतने सुंदर कवित्व का प्रदर्शन किया, जिसकी श्रेष्ठता स्वीकार करने में विश्व के किसी भी देश, प्राचीन अथवा अर्वाचीन को लेशमात्र भी झिझक नही होती। भारत के गर्वनर जनरल रहे वारेल हेस्टिंग्स […]