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संपादकीय

राष्ट्रदेव की पूजा करो

हमारे हिन्दू समाज में तैंतीस करोड़ देवों की कल्पना की गयी है। विद्वानों की अपनी-अपनी व्याख्याएं इस विषय में उपलब्ध हैं। हमें इस प्रकरण में प्रचलित व्याख्याओं का उल्लेख यहां विषयांतर के कारण नहीं करना है। आज हमें देवों के भी देव की आराधना करनी है, उसी की उपासना करनी है उसी की आरती उतारनी […]

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अन्य कविता

यह कैसी पूजा है?

बतला जीवन के आधार इसे, हैं मिट्टी, पानी और बयार।यदि रहा यह दूषण जारी, कैसे बचेगा यह संसार? क्या कभी उन्नत मानव ने, यह सोचकर देखा। निकट है काल की रेखा गुरूग्रंथ, बाइबिल, वेदों ने, तुझे प्रेरित किया अहिंसा को।वसुधा को कुटुम्ब बताया था, फिर अपनाया क्यों हिंसा को? जीवन के उच्चादर्शों की, निर्दयता से […]

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