इन नेताओं को कौन समझाये कि भारत में आतंकवाद की समस्या का मूल कारण अगर ‘अशिक्षा’ और बेरोजगारी होती तो भारत में क्रांति होती। सारे भूखे और बेरोजगार अशिक्षित संसद की ओर कूच करते, हमारे राजभवनों को आग लगाते, बैंक खातों में जमा धनराशि का हिसाब लेते और अपने अधिकारों का सम्मान करने वाले लोगों […]
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उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने की बात कहने वाले ‘बीमार प्रदेश’ बनाकर छोडक़र गये हैं। साम्प्रदायिक आतंकवाद से जूझता रहा उत्तर प्रदेश ‘सरकारी आतंकवाद’ से भी जूझता रहा। यह ‘सरकारी आतंकवाद’ जातीय आधार पर अधिकारियों की नियुक्ति या पुलिस में भर्ती के रूप में तो देखा ही गया, साथ ही अधिकारियों और पार्टी के […]
आतंकवाद और एलर्ट
हमारे देश में जब भी आतंकवादियो से संबंधित सूचनाये आती है या कोई आतंकी घटना घट जाती है तुरंत रेड एलर्ट व हाई एलर्ट घोषित हो जाता है और नगर के मुख्य विभिन्न स्थानों पर पुलिस सतर्क हो जाती है ? परंतु कोई सार्थकता नहीं लगती क्योकि वे संभवतः यह भूल जाते है कि उनको […]
आतंकवाद पर कायराना सियासत
अरविंद जयतिलक दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में ऐसे सियासतदानों की कमी नहीं जो अपने बोलवचन से न सिर्फ आतंकियों की हौसला आफजाई कर रहे हैं बल्कि उन्हें बेगुनाह बता देश की संप्रभुता से खिलवाड़ भी कर रहे हैं। आश्चर्य है कि जब पूरा देश मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट में मारे गए 257 लोगों के मुजरिम […]
डॉ प्रवीण तिवारी मुंबई धमाकों का गुनहगार फांसी पर चढ़ा दिया गया। भारतीय न्यायव्यवस्था और लोकतंत्र की सुंदरता भी दुनिया के सामने आई। इतने बड़े गुनाह के लिए किसी और मुल्क में पकड़े जाने के बाद ही सरेआम किसी को सजा दे दी जाती लेकिन ये हमारे लोकतंत्र की मजबूती है कि हमारे देश में […]
आतंकवाद को बढ़ावा देता भ्रष्टाचार
निर्भय कर्ण आतंकवाद को रोकने के लिए पूरी दुनिया प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हमेशा प्रतिबद्ध नजर आती है और इसके लिए एक से बढ़कर एक दावा भी किया जाता रहता है। इसके बावजूद आतंकवाद की घटना समय दर समय होती ही रहती है। एशिया की ही बात करें तो भारत विभीत्ष रूप से आतंकवाद […]
पेरिस में एक ‘शार्ली अब्दो’ पत्रिका के कार्यालय में आतंकियों ने जिस प्रकार प्रैस की स्वतंत्रता पर आक्रमण कर अपनी क्रूरता का नंगा नाच किया है, उससे विश्व समाज पुन: कुछ सोचने पर बाध्य हो गया है। विगत 7 जनवरी को घटी इस घटना पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है। भावनात्मक बातें भी हो […]
अनिल पारासर गतांक से आगे : परिणामस्वरूप यह आवश्यक हो गया कि कुछ अन्य उभरते हुए मानव अधिकारों के नए प्रतिमानों को मान्यता दी जाये, जो अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय निकायों द्वारा अपनी मान्यता हेतु दस्तक दे रहे हैं। उस श्रेणी से संबंधित पांच मुख्य मानव अधिकार है, जिन्हें मानव अधिकारों की तीसरी पीढ़ी कहा जा […]