“1- भारतं भारते भाति,भारते भाति भारती।” ” विभाति भारते भानुः,भक्ताः विभान्ति भारते।।” भावार्थ- मेरा भारत (भा में निरंतर रत रहने वाला )भारत में विभासित हो रहा है,भारती ( सरस्वती ) भारत में भासमान हो रही है,भानु ( भास्कर अपनी आभा से )भारत में विभासित हो रहा है और भक्तगण ( अपनी भक्ति से ) भारत […]
” भारतीय लोकतंत्र लोकगाथा”*