51 बचपन शाही जिंदगी, घर को राखे मस्त। चुप्पी तोड़ कहकहे भरे, रखती सबको व्यस्त।। रखती सबको व्यस्त, सभी चाहते हैं बचपन। तुतला करके बोल, सब लौटते अपने बचपन।। एक ही बच्चा भर देता है आंगन में किलकारी। सुन सुन कर खुशी मनाते पिता और महतारी।। 52 बचपन की अठखेलियां, सबको लेत रिझाय। दादाजी गर्वित […]
कुंडलियां … 16 सबको अच्छे लगते बच्चे…..