(यह आलेख हम पूज्य पिता महाशय राजेन्द्र आर्य जी की 24वीं पुण्यतिथि-13 सितंबर 2015 के अवसर पर प्रकाशित कर रहे हैं। अब से कुछ समय पश्चात श्राद्घ आरंभ होंगे। जिसे पितृकाल भी कहा जाता है। ऐसे अवसर पर यह आलेख समसामयिक है। (प्रस्तुति: सूबेदार मेजर वीर सिंह आर्य) आर्य समाज के पथ-प्रदर्शक एवं प्रवत्र्तक महर्षि […]
Month: September 2015
अंकुर विजयवर्गीय कुछ साल पीछे जाइये। 2007-08 की वैश्विक मंदी याद है न आपको। विश्व अर्थव्यवस्था अभी भी उससे पूरी तरह उभर नहीं पाई है। और अब उससे भी बड़ी वैश्विक मंदी की दस्तक पडऩे लगी है। आशंका है कि अक्टूबर 2015 में दुनिया की अर्थव्यवस्था के संकटग्रस्त होने की खबरें खुले आम हो जायेंगी। […]
बिहार में दिखने लगी उफान की राजनीति
सुरेश हिंदुस्थानी बिहार में चल रहे राजनीतिक घमासान में एक तरफ बेमेल जुगलबंदी राज्य की सत्ता प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा की तरह ही अपनी भाषण शैली के माध्यम से जनता को खींचने का प्रयास कर रहे हैं। बिहार में मोदी का […]
आज जब राजस्थान के राज्यपाल माननीय कल्याणसिंह जैसे लोग ‘जन-गण-मन’ के ‘अधिनायक’ शब्द पर आपत्ति करते हैं तो उसका अभिप्राय यह भी होता है कि हमारे द्वारा की गयी अब तक की ‘अधिनायक’ की चाटुकारिता ने इस देश के सम्मान को चोट पहुंचाई है और यह पूर्णत: हमारी गुलामी की मानसिकता का परिचायक है। इसलिए […]
नेताओं का व्यक्तिगत जीवन
देवेन्द्रसिंह आर्य जनता के प्रतिनिधि अपने बचाव के लिए अक्सर यह कहते मिलते हैं कि व्यक्ति का व्यक्तिगत जीवन अलग होता है और सार्वजनिक जीवन अलग होता है। इसलिए व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन में कभी तांक-झांक नही करनी चाहिए। यह तर्क दिखने में तो अच्छा लगता है और ऐसा आभास देता है कि ऐसा ही […]
आज का युग विज्ञान का युग है। विज्ञान ने मनुष्य का जीवन जहां आसान व सुविधाओं से पूर्ण बनाया है वहां अनेक समस्यायें एवं सामाजिक विषमतायें आदि भी उत्पन्न हुई हैं। विज्ञान व ज्ञान से युक्त मनुष्यों से अपेक्षा की जाती है कि वह जिस बात को जितना जाने उतना कहें और जहां उनकी पहुंच […]
काउंसलर्स के पास अक्सर इस तरह के फोन, ईमेल और पत्र आते हैं, जिनमें गांवों-कस्बों तथा छोटे शहरों के विद्यार्थी संसाधनों और मार्गदर्शन को लेकर अपनी व्यथा साझा करते हुए उपाय बताने का अनुरोध करते हैं। आम तौर पर इन इलाकों में रहकर स्वत: प्रेरणा और हौसले से मुश्किल डगर पर चलते हुए कामयाबी की […]
बालेन्दु शर्मा दाधीच अगर आपने कभी कंप्यूटर असेंबल करवाया हो तो आप जानते होंगे कि तमाम कलपुर्जों और हिस्सों को आपस में जोडक़र सीपीयू तैयार करना कितना मुश्किल काम है। बहरहाल, दूसरी चीजों के साथ-साथ कंप्यूटर भी बदल रहा है और उसका डिजाइन भी। ताइवानी कंपनी एसर ने कंप्यूटर सीपीयू के भविष्य की झलक दी […]
भारत जब भी अपने आजाद होने पर गर्व महसूस करता है तो उसका सर उन महापुरुषों के लिए हमेशा झुकता है जिन्होंने देश प्रेम की राह में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया. देश के स्वतंत्रता संग्राम में हजारों ऐसे नौजवान भी थे जिन्होंने ताकत के बल पर आजादी दिलाने की ठानी और क्रांतिकारी कहलाए. […]
समन्वय बैठक को लेकर पतंगबाजी
डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री किसी भी राष्ट्र की प्राण चेतना उसके समाज में ही होती है। उसको निरंतर सींचते रहना चाहिए, ताकि वह निर्जीव न हो जाए। यदि समाज निर्जीव हो जाएगा तो राष्ट्र भी निर्जीव हो जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उसी समाज चेतना को सशक्त करने के प्रयास में लगा है। राजनीति, समाज के […]