देश में आपातकाल लागू करने की घटना के चालीस वर्ष पूरे हो रहे हैं। 25 जून 1975 की रात्रि से देश में पहली बार आपातकाल लागू किया गया था। उस समय देश को स्वतंत्र हुए तीन दशक भी नही बीते थे कि अचानक लोगों की छाती पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वज्रपात करते हुए […]
Month: June 2015
भारत के विषय में मि. कोलमैन ने कहा है कि भारत के साधु संतों एवं कवियों ने नैतिक नियमों की शिक्षा दी, और इतने सुंदर कवित्व का प्रदर्शन किया, जिसकी श्रेष्ठता स्वीकार करने में विश्व के किसी भी देश, प्राचीन अथवा अर्वाचीन को लेशमात्र भी झिझक नही होती। भारत के गर्वनर जनरल रहे वारेल हेस्टिंग्स […]
आचार्य बालकृष्ण – यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है . – इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आँख में लगाने से आँख का दर्द ठीक हो जाता है . – पीपल की ताज़ी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी है . – पीपल के ताज़े पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर […]
यूनानी नही बढ़ पाये थे आगे अमेरिका में कुछ समय पूर्व सिकंदर पर एक फिल्म बनायी गयी थी। जिसमें दर्शाया गया था कि सिकंदर झेलम के किनारे पोरस से अपमानजनक ढंग से पराजित हुआ था। सिकंदर की वीरता से तो यूनानी हतप्रभ थे। साथ ही उन्हें जिस बात ने सर्वाधिक प्रभावित और भयभीत किया था […]
1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तो सीमा की अनिश्चितता उस समय सबसे बड़ा प्रश्न था। हर व्यक्ति को यही चिंता सताये जा रही थी कि देश की सीमाएं घटकर कहां तक रह जाने वाली हैं? संभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता थी कि वह स्वतंत्रता के पश्चात भारत में रहेंगे […]
वास्तव में हम 1400 ई. से 1526 ई. तक (जब तक कि बाबर न आ गया था) के काल में उत्तर भारत में अपने-अपने साम्राज्य विस्तार के लिए विभिन्न शक्तियों के मध्य हो रहे संघर्ष की स्थिति देखते हैं। इसी संघर्ष की स्थिति से गुजरात, मालवा और मेवाड़ निकल रहे थे। ये एक दूसरे से आगे निकलने और एक दूसरे […]
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में कई चीजें बेतरतीब रूप में देखी गयीं। उन सब में प्रमुख थी किसी भी सरकारी विज्ञापन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ-साथ कांग्रेस की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी के चित्र का लगा होना। यह लोकतंत्र और लोकतंत्र की भावना के विरूद्ध किया गया कांग्रेसी आचरण था। […]
गंगा हिंदुओं के लिए प्राचीन काल से ही एक पवित्र नदी रही है। हिमालय से निकलने वाली यह नदी गंधक के पहाड़ से निकलकर आती है, इसलिए इसके जल में बहुत से रोगों को समाप्त करने और दीर्घकाल तक स्वच्छ बने रहने की अद्भुत क्षमता होती है। इस नदी में प्रतिदिन लगभग बीस लाख लोग […]
योग को साम्प्रदायिक रंग मत दो
योग चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम है। चित्त की वृत्तियां हर व्यक्ति को समान रूप से दुखी करती हैं। यदि उन पर व्यक्ति नियंत्रण स्थापित कर लेता है तो व्यक्ति महानतम कार्यों का निष्पादन करने में सफल हो जाता है। आज इसी योग को विश्व स्तर पर स्थापित करने की दिशा में हम […]
1.) पहली आज्ञा अक्षैर्मा दिव्य ( ऋग्वेद 10/34/13 ) अर्थात जुआ मत खेलो । इस आज्ञा का उल्लंघन हुआ। इस आज्ञा का उल्लंघन धर्म राज कहे जाने वाले युधिष्ठर ने किया । परिणाम-एक स्त्री द्रौपदी का भरी सभा में अपमान । महाभारत जैसा भयंकर विश्व युद्ध जिसमे करोड़ो सेना मारी गयी । लाखो योद्धा मारे […]