डा. मधु सूदन(1) वह उत्सव समाज में समन्वयता, सामंजस्य, सुसंवादिता, या भाईचारा बढाने वाला हो।(2) ऊंच-नीच या अलगता का भाव प्रोत्साहित करनेवाला ना हो।(3) समाज के अधिकाधिक सदस्यों का उत्थान करने वाला हो।(4) समाज के सभी स्तरों को स्पर्श करने की क्षमता रखता हो।(5) सांस्कृतिक परम्पराओं से जुडने की क्षमता रखता हो ।व्हॅलंटाईन डे, इनमें […]
Month: March 2013
धाराशायी हो रहे मीडियाई सैनिक
विकास गुप्ताभारतीय मीडिया का समग्र ढांचा कहीं न कहीं पाश्चात्य मीडिया के अनुसरण पर आधारित है। इतिहास गवाह हैए मीडिया शब्द को वैश्विक स्तर के अनेक पत्रकारों ने खून.पसीने से सींचा है। प्रख्यात द टाईम्स ने एक सिद्धान्त बनाया था कि समाचार पत्र भण्डाफोड़ से जीवित रहते हैं। द टाईम्स को सरकार की आवाज कहा […]
आओ जानें विश्व का भूगोल
पृथ्वीपृथ्वी गोलाकार है, परंतु देखने में चपटी प्रतीत होती है। इसकी आकृति लध्वक्ष गोलाभ कहलाती है। पृथ्वी की परिधि 40,075 किलोमीटर है। भूमध्यरेखीय व्यास 12,756 किलोमीटर और धु्रवीय व्यास 12,714 किलोमीटर है। स्थलीय भाग का क्षेत्रफल 15,30,00000 वर्ग किमी. है। पृथ्वी में रासायनिक तत्वों का द्रव्यमानतत्व […]
बावल को मिला सब डिविजन का दर्जा
राजीव अग्रवालरेवाड़ी। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज बावल को सब डिविजन का दर्जा देने, मनेठी को उप तहसील का दर्जा, बावल में कृषि कॉलेज, पाली में महिला कॉलेज, बावल में बस स्टैंड तथा अनाज मंडी बनाने की घोषणा की। श्री हुड्डा आज यहां रेवाड़ी जिले के बावल में आयोजित एक विशाल […]
राजीव अग्रवालरेवाड़ी, बावल में कांग्रेस की होने वाली रैली से गुडग़ांव के सांसद राव इंद्रजीत ङ्क्षसह की उपेक्षा को लेकर तथा राव के द्वारा 24 फरवरी के जवाब में 3 मार्च को पटौदी की रैली को लेकर इन दिनों राजनैतिक गलियारों में गर्मागर्म चर्चा चल रही है कि राव अपनी ही पार्टी में अपनी उपेक्षा […]
सरस्वती का आध्यात्मिक रहस्य
उपनिषदों का मानना है कि जो पिण्ड में है वही विशाल रूप में ब्रह्मांड में है, और जो ब्रह्मांड में है वही सूक्ष्म रूप में पिण्ड में है। पिण्ड में आत्मा है तो ब्रह्मांड में परमात्मा है। हमारे ऋषि मुनियों ने जो ब्रह्मांड में देखा उसे पिण्ड में खोजा। उन्होंने प्राचीन काल में गंगा, यमुना […]
मनीराम शर्मादेश की आजादी के समय हमारे पूर्वजों के मन में बड़ी उमंगें थी और उन्होंने अपने और आने वाली पीढिय़ों के लिए सुन्दर सपने संजोये थे। आज़ादी से लोगों को आशाएं बंधी थी कि वे अपनी चुनी गयी सरकारों के माध्यम से खुशहाली और विकास का उपभोग करेंगे । देश में कुछ विकास तो […]