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बिखरे मोती

समझें, आत्मकेन्द्रित होने के सही अर्थ

प्राय: देखा गया है कि लोग आत्मकेन्द्रित होने का अर्थ अपने तक सीमित रहना, जिसे अंग्रेजी में रिजर्व नेचर कहते हैं। यह तो स्वार्थपरता है, अर्थ का अनर्थ है। आत्मकेन्द्रित होने से वास्तविक अभिप्राय है-अपने आत्मस्वरूप में केन्द्रित होना, अनंत आनंद में जीना, संतोष, सरसता और शांति में जीना। इसके लिए ध्यान में उतरने का […]

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प्राय: देखा गया है कि लोग आत्मकेन्द्रित होने का अर्थ अपने तक सीमित रहना, जिसे अंग्रेजी में रिजर्व नेचर कहते हैं। यह तो स्वार्थपरता है, अर्थ का अनर्थ है। आत्मकेन्द्रित होने से वास्तविक अभिप्राय है-अपने आत्मस्वरूप में केन्द्रित होना, अनंत आनंद में जीना, संतोष, सरसता और शांति में जीना। इसके लिए ध्यान में उतरने का […]

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राजनीति

भ्रष्टाचार अनुकूल परिस्थितियों में पनपता है

भ्रष्टाचार के प्रसंग में जन लोकपाल बिल पर भारत में यह गर्मागर्म बहस का विषय रहा कि इसके दायरे से किसे बाहर रखा जाये7 वैसे भी भ्रष्टाचार पर अंतर्राष्ट्रीय संधि -2003 की भारत ने काफी विलम्ब से वर्ष 2011 में पुष्टि की है जिससे भ्रष्टाचार के विषय में भारत की संजीदगी, गंभीरता और प्रतिबद्धता का […]

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राजनीति

भ्रष्टाचार अनुकूल परिस्थितियों में पनपता है

भ्रष्टाचार के प्रसंग में जन लोकपाल बिल पर भारत में यह गर्मागर्म बहस का विषय रहा कि इसके दायरे से किसे बाहर रखा जाये7 वैसे भी भ्रष्टाचार पर अंतर्राष्ट्रीय संधि -2003 की भारत ने काफी विलम्ब से वर्ष 2011 में पुष्टि की है जिससे भ्रष्टाचार के विषय में भारत की संजीदगी, गंभीरता और प्रतिबद्धता का […]

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विशेष संपादकीय

रामजेठमलानी का निलंबन: भाजपा की भूल सुधार

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने रामजेठमलानी को पार्टी से निलंबित कर दिया है। रामजेठमलानी जैसे लोग समाज से मिलने वाली प्रतिष्ठा को अपनी बपौती मानकर चलते हैं। इसलिए वह उस प्रतिष्ठा की अमानत को अपने सिर पर ओढ़कर चलते हैं। जिससे गर्व से फूलकर उनका सिर भारी होता चला जाता है। फलस्वरूप वह अपनी अवधारणाओं […]

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विशेष संपादकीय

रामजेठमलानी का निलंबन: भाजपा की भूल सुधार

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने रामजेठमलानी को पार्टी से निलंबित कर दिया है। रामजेठमलानी जैसे लोग समाज से मिलने वाली प्रतिष्ठा को अपनी बपौती मानकर चलते हैं। इसलिए वह उस प्रतिष्ठा की अमानत को अपने सिर पर ओढ़कर चलते हैं। जिससे गर्व से फूलकर उनका सिर भारी होता चला जाता है। फलस्वरूप वह अपनी अवधारणाओं […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

हिंदुत्व के पुजारी ठाकरे

‘किसी भी भाषा के एक ही शब्द में थोड़ा परिवर्तन कर देने मात्र से शब्दों के अर्थों में परिवर्तन आ जाया करता है। जैसे ताप, संताप, प्रताप और परिताप। ताप का अर्थ गर्मी है, संताप का अर्थ है-जो व्यक्ति को व्यथित करे, दुखी करे, प्रताप का अर्थ है जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

हिंदुत्व के पुजारी ठाकरे

‘किसी भी भाषा के एक ही शब्द में थोड़ा परिवर्तन कर देने मात्र से शब्दों के अर्थों में परिवर्तन आ जाया करता है। जैसे ताप, संताप, प्रताप और परिताप। ताप का अर्थ गर्मी है, संताप का अर्थ है-जो व्यक्ति को व्यथित करे, दुखी करे, प्रताप का अर्थ है जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित […]

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प्रमुख समाचार/संपादकीय

भारतीय संविधान के कुछ आपत्तिजनक अनुच्छेद

संपादक की नई पुस्तक । इसे पढ़ने के लिए जाएँ इस लिंक पर भारतीय संविधन के कुछ आपत्तिजनक अनुच्छेद

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