विचार लो कि मृत्य हो न मृत्यु से डरो कभी । मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी । हुई न यूं सुमृत्यु तो वृथा मरे वृथा जिए। मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। यही पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे वही मनुष्य है कि जो… उसी उदार […]
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।