बृजेन्द्र सिंह वत्स लोकतंत्र में संवाद उसके प्राण होते हैं और संवाद स्थल संसद उस का मंदिर, संभवतः इसीलिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष२०१४,भारत का आधिकारिक संवत,शक संवत १९३६ में जब संसद में प्रथम बार प्रवेश किया था, तो संसद की ढ्योड़ी का वंदन करके इस लोकतंत्र के मंदिर की अभ्यर्थना की थी […]