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धर्म-अध्यात्म

ऋषियों का संदेश है कि संसार के सभी प्राणियों में एक समान आत्मा है

ओ३म् ========== हम मनुष्य हैं। हम वेदों एवं अपने पूर्वज ऋषियों आदि की सहायता से जानते हैं कि संसार में जितनी मनुष्येतर योनियां पशु, पक्षी, कीट-पतंग व जीव-जन्तु आदि हैं, उन सबमें हमारी आत्मा के समान ही एक जैसी जीवात्मा विद्यमान है। यह जीवात्मा शरीर से पृथक एक सत्य, सनातन एवं चेतन सत्ता है। जीवात्मा […]

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व्यक्तित्व

स्वामी प्रणवानंद जी को 75 वें जन्म दिवस पर बधाई : आर्य समाज के गौरव वैदिक धर्म अनुरागी एवं ऋषि भक्त स्वामी प्रणवानंद सरस्वती

ओ३म् =========== स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती जी (जन्म दिवस 7-7-1947) आर्यजगत् के विख्यात संन्यासी है। आपने अपना पूरा जीवन वैदिक धर्म और आर्यसमाज की सेवा में लगाया है। आप ने आर्ष पाठविधि से गुरुकुल झज्जर तथा गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार में अध्ययन किया है। स्वामी ओमानन्द सरस्वती तथा डा. रामनाथ वेदालंकार जी आपके आचार्य रहे हैं। डा. […]

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समस्त पृथ्वी पर एक दयानंद ही पूर्ण ब्रह्मचारी पूर्ण योगी और पूर्ण ऋषि था : आचार्य वेद प्रकाश श्रोत्रिय

ओ३म् ========= (आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय जी आर्यजगत् के शीर्षस्थ विद्वान एवं प्रभावशाली वक्ता है। 3 वर्ष पूर्व दिनांक 2-6-2018 को उन्होंने गुरुकुल पौन्धा-देहरादून के उत्सव में एक अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली व्याख्यान दिया था। उनका यह व्याख्यान आज भी प्रासंगिक एवं उपयोगी है। हम उनके उसी व्याख्यान को प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसे व्याख्यान बहुत […]

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आज का चिंतन

अग्निहोत्र करने से वेद सफल हो जाते हैं : स्वामी धर्मेश्वरानंद सरस्वती

ओ३म् ========= [निवेदन- स्वामी धर्मेश्वरानन्द सरस्वती जी आर्यसमाज के उच्चकोटि के संन्यासी, विद्वान, प्रचारक एवं गुरुकुलों के संचालक थे। कुछ वर्ष पूर्व उनका अचानक हृदय गति रुक जाने से देहावसान हो गया था। हमने अनेक स्थानों पर उनको अनेक बार सुना है। वह जब भी मिलते थे हमें स्नेह देते थे। उनका व्यक्तित्व भी सुन्दर […]

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उगता भारत न्यूज़

आर्य पत्र-पत्रिकाओं के माननीय संपादकों के सम्मान की योजना

समाचार ओ३म् ………. वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार में हमारे विद्वानों तथा भजनोपदेशकों सहित आर्य साहित्य के प्रकाशकों एवं नियमित प्रकाशित वैदिक विचारधारा प्रधान आर्य पत्र-पत्रिकाओं का भी प्रशंसनीय योगदान है। समाज में जो भी व्यक्ति वैदिक धर्म एवं ऋषि भक्ति से प्रभावित होकर वैदिक धर्म प्रचार में सहायक होता है, वह सभी सम्मानीय होते हैं। […]

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व्यक्तित्व

पंडित विश्वनाथ विद्यालंकार का संक्षिप्त परिचय

====== अथर्ववेद और सामवेद भाष्यकार तथा अनेक प्रसिद्ध वैदिक ग्रंथों के रचयिता पण्डितप्रवर श्रद्धेय श्री विश्वनाथ विद्यालंकार विद्यामार्तण्ड वैदिक साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान् थे। उनका विद्याध्ययन गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार की गंगापार की तपःस्थली में हुआ था, जहाँ उन्होंने महात्मा मुंशीराम (बाद में स्वामी श्रद्धानन्द संन्यासी) के सांनिध्य में व्रत साधना करते हुए विविध विद्याओं […]

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व्यक्तित्व

आत्मा को मनुष्य की योनि मिलना परमात्मा की दया तथा कृपा का परिणाम है : वेदानंद सरस्वती

ओ३म् -स्वामी वेदानन्द सरस्वती (निधन 12-6-2021) को श्रद्धांजलि- ============== (वेदों के उच्च कोटि के विद्वान एवं योग साधक व उपासक स्वामी वेदानन्द सरस्वती, उत्तरकाशी का दिनांक 12-6-2021 को निधन हो गया। उनका निधन आर्यसमाज की अपूरणीय क्षति है। वैदिक साधन आश्रम तपोवन स्वामी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनको श्रद्धांजलि स्वरूप उनका वैदिक […]

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धर्म-अध्यात्म

गुरुकुल मंझावली की स्थापना की पृष्ठभूमि और संक्षिप्त इतिहास

ओ३म् ======== आर्ष गुरुकुल गौतमनगर, दिल्ली के अन्तर्गत सम्प्रति आठ गुरुकुलों का संचालन हो रहा है। गुरुकुल गौतमनगर अन्य सभी गुरुकुलों की केन्द्रीय शाखा है। हरयाणा राज्य के फरीदाबाद जिले में यमुना तट पर स्थित गुरुकुल गौतमनगर की पहली शाखा गुरुकुल मंझावली की स्थापना स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती जी ने 5 जून, सन् 1994 को की […]

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आज का चिंतन

ऋषि दयानंद की एक प्रमुख देन, सृष्टि का प्रवाह से अनादि होने का सिद्धांत

ओ३म् ऋषि दयानन्द ने देश और संसार को अनेक सत्य सिद्धान्त व मान्यतायें प्रदान की है। उन्होंने ही अज्ञान तथा अन्धविश्वासों से त्रस्त विश्व व सभी मतान्तरों को ईश्वर के सत्यस्वरूप से अवगत कराने के साथ ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना तथा उपासना एवं अग्निहोत्र यज्ञ का महत्व बताया तथा इनके क्रियात्मक स्वरूप को पूर्ण बुद्धि […]

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धर्म-अध्यात्म

वेदों से ही हमें ऋषि मुनि और राम,कृष्ण ,दयानंद आदि महान पुरुष मिले

ओ३म् मनुष्य का निर्माण माता-पिता के पालन पोषण सहित उनके द्वारा दिये जाने वाले संस्कारों से होता है। माता-पिता हमें जो संस्कार देते हैं उन्हें वह विरासत में अपने माता-पिता व आचार्यों से प्राप्त होते हैं। हमारी यह सृष्टि 1.96 अरब वर्ष पुरानी है। इतने ही वर्ष पूर्व भारत वा आर्यावर्त के वर्तमान स्थान तिब्बत […]

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