आर्य लोग व्यक्तिगत जीवन की पवित्रता पर बल दिया करते थे। विवाह से पूर्व वीर्य स्खलन की संभावना उनके व्यक्तिगत जीवन में रंचमात्र भी नहीं होती थी। संतानोत्पत्ति के लिए विवाह करना उनके जीवन का लक्ष्य होता था। वीर्य शक्ति के संरक्षण से ही व्यक्तिगत जीवन की शुचिता बनी रह सकती है, इस बात को […]