भारत का आध्यात्मिक शिक्षा संस्कार “सन्तानों को उत्तम विद्या, शिक्षा, गुण, कर्म्म और स्वभावरूप आभूषणों का धारण कराना माता, पिता, आचार्य्य और सम्बन्धियों का मुख्य कर्म है।” महर्षि दयानंद अपने इस पवित्र वचन के साथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के तृतीय समुल्लास का शुभारंभ करते हैं । हम सभी भली प्रकार यह जानते हैं कि भारत ज्ञान […]