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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

नेहरू की विदेश नीति के मिथक को तोड़ते राजनाथ सिंह

विदेश नीति और रक्षा नीति का राजनीति में गहरा संबंध होता है। यह दोनों अन्योन्याश्रित होते हैं। इन दोनों को लेकर ही राजनीति में कूटनीति का खेल चलता है। जो देश कूटनीति के माध्यम से अपनी राजनीति को सही दिशा देने में सफल होता है वही अपनी विदेश नीति और रक्षा नीति को सबल बनाने […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 7 ख , परित्याग के योग्य ग्रंथों की सूची

परित्याग के योग्य ग्रंथों की सूची परित्याग के योग्य ग्रंथों की सूची भी महर्षि ने हमारे समक्ष प्रस्तुत की है। उनके प्रमुख नाम उन्होंने इस प्रकार दिए हैं :- व्याकरण में कातन्त्र, सारस्वत, चन्द्रिका, मुग्धबोध, कौमुदी, शेखर, मनोरमा आदि। कोश में अमरकोशादि। छन्दोग्रन्थ में वृत्तरत्नाकरादि। शिक्षा में ‘अथ शिक्षां प्रवक्ष्यामि पाणिनीयं मतं यथा’ इत्यादि। ज्यौतिष में शीघ्रबोध, मुहूर्त्तचिन्तामणि आदि। काव्य में नायिकाभेद, कुवलयानन्द, रघुवंश, माघ, किरातार्जुनीयादि। मीमांसा में […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 7 क , आर्ष -अनार्ष ग्रंथ और महर्षि दयानंद

आर्ष -अनार्ष ग्रंथ और महर्षि दयानंद हमें क्या पढ़ना चाहिए ?- यह बात सृष्टि प्रारंभ से ही बड़ी महत्वपूर्ण रही है। कई लोग उपन्यास आदि के पढ़ने में भी समय लगाते हैं, परंतु उनका वह पुरुषार्थ व्यर्थ ही जाता है। उल्टे उनके मन मस्तिष्क में वासनात्मक बीजारोपण करके उनका अहित और कर जाता है । […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 6 , क्षत्रिय भी वेदाध्ययन करने वाले हों

क्षत्रिय भी वेदाध्ययन करने वाले हों वेद मनुष्य के मनुष्यत्व को देवत्व में परिवर्तित करने की शक्ति और सामर्थ्य रखते हैं। इनके अध्ययन से मनुष्य देवत्व की अपनी साधना को प्राप्त करता है। उसी से वह मोक्ष की प्राप्ति करने में सफल होता है। इस प्रकार वेदाध्ययन मनुष्य को मोक्ष दिलाता है । जबकि अन्य […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 5 व्यक्तिगत जीवन है सार्वजनिक जीवन का आधार

आर्य लोग व्यक्तिगत जीवन की पवित्रता पर बल दिया करते थे। विवाह से पूर्व वीर्य स्खलन की संभावना उनके व्यक्तिगत जीवन में रंचमात्र भी नहीं होती थी। संतानोत्पत्ति के लिए विवाह करना उनके जीवन का लक्ष्य होता था। वीर्य शक्ति के संरक्षण से ही व्यक्तिगत जीवन की शुचिता बनी रह सकती है, इस बात को […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 4, हम आर्य बनकर करते थे संसार का मार्गदर्शन

हम आर्य बनकर करते थे संसार का मार्गदर्शन भारत के प्राचीन गौरव पर प्रकाश डालते हुए अपनी एक कविता में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी लिखते हैं कि :- हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी भू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 3 भारत का आध्यात्मिक शिक्षा संस्कार

भारत का आध्यात्मिक शिक्षा संस्कार “सन्तानों को उत्तम विद्या, शिक्षा, गुण, कर्म्म और स्वभावरूप आभूषणों का धारण कराना माता, पिता, आचार्य्य और सम्बन्धियों का मुख्य कर्म है।” महर्षि दयानंद अपने इस पवित्र वचन के साथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के तृतीय समुल्लास का शुभारंभ करते हैं । हम सभी भली प्रकार यह जानते हैं कि भारत ज्ञान […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 2 क गर्भाधान संस्कार का महत्व

गर्भाधान संस्कार का महत्व प्राचीन भारत में संतानोत्पत्ति कोई खेल खेल में किया गया कार्य नहीं होता था, अपितु इस क्रिया को इस प्रकार संपन्न किया जाता था कि जैसे यह माता-पिता का विशेष और सबसे पवित्र कर्तव्य हो। जिसके निर्वाह के माध्यम से समाज और संसार को उत्तम संतान देकर वे एक महान ऋण […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 2 क

शिक्षा संस्कार और सत्यार्थ प्रकाश महर्षि दयानंद जी महाराज ने आर्यों के गौरवपूर्ण अतीत को ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के प्रत्येक पृष्ठ पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है । उनका यह प्रयास उज्ज्वल भारत के उज्ज्वल भविष्य की स्वर्णिम योजना का एक खाका माना जाना चाहिए। उन्होंने अतीत को वर्तमान के मंच पर प्रस्तुत कर भविष्य […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विमर्श अध्याय – 1 भाग ( ख) ईश्वर के 100 नामों की व्याख्या

इतिहासकारों को देना चाहिए ध्यान महर्षि दयानंद जी महाराज सत्यार्थ प्रकाश के प्रथम समुल्लास में कुछ अन्य शब्दों की भी परिभाषा करते हैं। जिसमें उन्होंने ईश्वर के 100 नामों को व्याख्यायित किया है। इसके माध्यम से स्वामी जी महाराज हमारी कई प्रकार की भ्रांतियों का समाधान कर देते हैं। जिन्हें वर्तमान समय में इतिहासकारों को […]

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