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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय (18) राजा के मंत्री और दूत कैसे हों?

राजा के मंत्री और दूत कैसे हों? संसार के जिन- जिन देशों में आज तानाशाही है या अबसे पूर्व में तानाशाही रही है, वहां के शासकों की एक प्रवृत्ति देखी गई है कि वे अपने बौद्धिक बल पर ही अधिक विश्वास रखते हैं। जैसे चाहें जो चाहें – उसे पूरा करना उनकी प्रवृत्ति में सम्मिलित […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 17( ख ) कामज दोष

कामज दोष महर्षि मनु ने काम से उत्पन्न हुए दस दोषों के बारे में हमें बताया है कि :- मृगयाक्षो दिवास्वप्नः परीवादः स्त्रियो मदः। तौर्य्यत्रिकं वृथाट्या च कामजो दशको गणः।। ( सत्यार्थ प्रकाश छठा समुल्लास) इसका हिंदी अर्थ करते हुए महर्षि हमें बताते हैं कि काम से उत्पन्न हुए व्यसनों के चलते व्यक्ति के भीतर […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 17 क देश के सभासद कैसे हों?

देश के सभासद कैसे हों? वैश्विक राजनीति में वर्त्तमान में लोकतंत्र भीड़ तंत्र होने के कारण मूर्खों का तंत्र कहा जाता है। यद्यपि आज के लोकतंत्र के बारे में यह भी सच है कि अनेक अशिक्षित, कुपढ़ और अविद्वान लोगों के एक साथ बैठ जाने या जनता के प्रतिनिधि बन जाने का अभिप्राय यह नहीं […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय ( 16 ) धर्म ही व्यवस्था का प्रतीक है

धर्म ही व्यवस्था का प्रतीक है स्वामी दयानंद जी भारत में राजा को चारित्रिक गुणों में बहुत ही उत्तम देखने के पक्षधर थे। उनकी इच्छा थी कि जिस प्रकार आर्य राजाओं के भीतर गुण हुआ करते थे वैसे ही गुण आज के राजनीतिज्ञों के भीतर भी होने चाहिए। राजा के 36 गुण महाभारत में राजा […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 15 ( ख ) दुष्टों के लिए दंड

दुष्टों के लिए दंड जनसाधारण धर्म की मर्यादा का स्वाभाविक रूप से पालन करते हैं इसलिए उन्हें दंड की आवश्यकता नहीं पड़ती। जबकि दुष्ट प्रवृत्ति के लोग कठोरता से ही सीधे चलते हैं। इस प्रकार दंड और धर्म एक ही सिक्के के दो पहलू हो गए। यही कारण है कि बुद्धिमान लोग दंड को ही […]

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1857 की क्रांति की नायिका रानी झांसी के किले में

12 नवंबर 2022 समय लगभग 2:30 हमने रानी झांसी के ऐतिहासिक किले में अपने साथियों श्रीनिवास आर्य ,रविंद्र आर्य एवं अजय कुमार आर्य के साथ प्रवेश किया। किले के मुख्य द्वार पर प्रवेश करते ही रानी झांसी के बारे में श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित कविता “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी […]

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ओरछा के इतिहास की संक्षिप्त जानकारी

ओरछा का हमारे गौरवपूर्ण हिंदू इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यहां की कई वीरता पूर्ण रोमांचकारी घटनाएं भारतीय इतिहास की धरोहर हैं। जिनका उल्लेख हम यहां पर करेंगे। बेतवा नदी के किनारे पर बसा ओरछा कभी परिहार राजाओं की राजधानी हुआ करता था। गुर्जर प्रतिहार राजवंश को ही परिहार के नाम से जाना जाता है।ओरछा मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड सम्भाग […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 15 (क) दंड, राजा और शासन व्यवस्था

दंड, राजा और शासन व्यवस्था तेजस्वी राष्ट्रवाद के निर्माण के लिए आवश्यक है कि राजा परम तेजस्वी हो। जो राजा या प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति तेजहीन होता है, वह देशविरोधी शक्तियों के समक्ष झुक जाया करता है। उसके भीतर साहस का अभाव होता है। जिसके कारण वह देशद्रोही शक्तियों का उचित समय पर शमन और दमन […]

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ओरछा के प्रसिद्ध ऐतिहासिक भवन और किले से : रानी सारंधा और ओरछा किला

  आज अपने समाचार पत्र “उगता भारत” की टीम के साथ ओरछा के प्रसिद्ध ऐतिहासिक भवन और किले को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां पर झांसी में रहने वाले अपने शुभचिंतक श्री मुन्ना लाल जी सेन के द्वारा इस ऐतिहासिक स्थल को दिखाने के लिए विशेष रूप से व्यवस्था की गई और हमारा प्रतिनिधिमंडल […]

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सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विर्मश ( एक से सातवें समुल्लास के आधार पर) अध्याय 14 ख जनप्रतिनिधियों का सम्मान

जनप्रतिनिधियों का सम्मान यहां पर वेद ने राजा के प्रशंसनीय गुणों पर चर्चा की है। प्रशंसनीय गुण, कर्म, स्वभाव तभी कहे जा सकते हैं जब कोई व्यक्ति चरित्र बल में ऊंचा होता है। यदि कोई व्यक्ति चरित्र से गिरा हुआ है तो उसे प्रशंसनीय, गुण, कर्म ,स्वभाव युक्त सत्करणीय, माननीय नहीं कहा जा सकता। आजकल […]

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