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संपादकीय

मानवाधिकारवादी सुनें:पंछी की तड़प

महाभारत के युद्घ में सर्वाधिक शालीन और मर्यादा की प्रतिमूर्ति, असाधारण व्यक्तित्व और प्रतिभा के धनी महात्मा विदुर का चिंतन इस राष्ट्र की गौरवपूर्ण थाती है। उनका चिंतन हजारों वर्षों से हमारा मार्गदर्शन करता आया है और अनंतकाल तक करता रहेगा। इस महात्मा ने लोकहितकारी शासक और शासन की आवश्यकता पर बल देते हुए मानवाधिकारों […]

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संपादकीय

बिगड़ता पर्यावरण संतुलन और यज्ञ

आर्थिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए ही नही अपितु सामाजिक व्यवस्था को भी सही प्रकार से चलाये रखने के लिए ‘ले और दे’ का सिद्घांत बड़ा ही कारगर माना जाता है। भारतीय संस्कृति में तो इसे और भी अधिक श्रद्घा और आस्था का प्रतीक बनाकर धार्मिक व्यवस्था के साथ जोड़ दिया गया। […]

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इतिहास की समाधि पर कैमरून

भारत में शिक्षा पद्घति की प्रचलित परंपरा को बदलकर अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को भारत में लागू कर अंग्रेज जाति के भारत में युग युगों तक शासन करने का सपना बुनने वाले लॉर्ड मैकाले ने जब इतिहास को थोड़ा दूर से देखा और उसका अंतिम समय आया तो उसे ‘सच का बोध हुआ’ और उसने कहा-मुझे […]

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हैलिकोप्टर घोटाला-जनता करे फैसला

–विश्व के कभी के विशालतम रोमन साम्राजय का पतन हुआ -फ्रांस में लुई राजसत्ता के विरूद्घ सफल क्रांति हुई -रूस में जारशाही के विरूद्घ सफल क्रांति हुई -चीन ने भी पुरानी केंचुली के विरूद्घ बगावत की, -लीबिया के कर्नल गददाफी के शासन का अंत हुआ। -सद्दाम हुसैन का अंत हुआ। ये और इन जैसी अन्य […]

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राणा उदय सिंह के साथ न्याय करो

महाराणा प्रताप सिंह के पिता राणा उदय सिंह के साथ इतिहास में न्याय नही किया गया। सचमुच उनकी आत्मा आज तक हमारे द्वारा अपने साथ किये गये व्यवहार को लेकर दुखी होगी। हमने राणा उदय सिंह को बहुत ही ‘दुर्बल और कायर’ राणा सिद्घ करके रख दिया है। महाराणा प्रताप के प्रति जहां असीम श्रद्घा […]

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संपादकीय

राजनाथ बने भाजपा के भाग्यनाथ

नितिन गडकरी बहुत असफल अध्यक्ष नही थे लेकिन राजनीति में कभी कभी बना बनाया महल भी पल भर में ढह जाता है। यही उनके साथ हुआ है। भाजपा उन्हें अपना अध्यक्ष मान चुकी थी और उनके नाम पर मुहर लगना ही शेष रह गया था। पर भाग्य ने अंतिम क्षणों में पलटा खाया और उनके […]

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संपादकीय

भारत में ये समाचार क्यों नही बनते

दिल्ली दुष्कर्म का प्रकरण ठंडा भी नही हुआ था कि ऐसे ही विभिन्न दुष्कर्मों की खबरें समाचार पत्रों में इतनी बढ़ीं कि अखबारों को उठाकर देखने में भी शर्म आने लगी। ऐसी घटनाओं को ढूंढ़ ढूंढ़कर लाया जाकर परोसा जाने लगा, मीडिया में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इन घटनाओं को टीवी पर इतना अधिक दिखाया कि […]

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संपादकीय

मनमोहन जी: अब शस्त्राग्रह और युद्घ करो

1998 की वह घटना जब इलियास कश्मीरी नाम का आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसा और भारत के एक सैनिक की गर्दन काटकर ले गया। बाद में उसे तत्कालीन पाकिस्तानी सैनिक शासक परवेज मुशर्रफ ने इस ‘साहसिक कार्य’ के लिए एक लाख का पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कारगिल युद्घ में कैप्टन सौरभ कालिया की आंखें पाक सैनिकों ने निकाल लीं […]

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हिंदी की मिट्टी पीटते ये लोग

हिंदी को पंडित नेहरू ने हिंदुस्तानी कहकर संबोधित किया था। उन्होंने राष्ट्रभाषा को उपहास की दृष्टि से देखा और उपहास के रूप में ही इसे स्थापित करने का प्रयास किया। हिंदुस्तानी से अभिप्राय नेहरू एण्ड कंपनी का एक ऐसी भाषा से था जिसमें सभी भाषाओं के शब्द सम्मिलित कर लिए जाऐं और एक खिचड़ी भाषा […]

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संपादकीय

देश की बेटी ने जगा दिया देश

जिन लोगों ने अपनी कलम बेची उन्होंने ही ईमान बेचा और जिन्होंने ईमान (धर्म परिवर्तन किया) बेचा उन्होंने ही हिंदुस्तान बेचा। बाहर से आने वाले विदेशी लोगों से देश को कभी खतरा नही रहा-बल्कि देश के भीतर रहकर विदेशियों के मित्र बनकर रहने वालों से देश को खतरा रहा है। अमरीका सहित विश्व के सभी […]

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