============= संसार में जीवात्माओं को परमात्मा की कृपा से अपने-अपने कर्मानुसार भिन्न-भिन्न योनियों में जन्म प्राप्त होता रहता है। सभी योनियों में मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ एवं महत्वपूर्ण है। मनुष्येतर योनियों में आत्मा की ज्ञान आदि की उन्नति नहीं होती। मनुष्येतर योनियों में भोजन एवं जीवन व्यतीत करने के लिये स्वाभाविक ज्ञान होता है। वह […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
महाभारत काल में भी नारियों की स्थिति बहुत सम्मान पूर्ण थी । यद्यपि इसी काल में द्रोपदी के चीर हरण होने से कुछ लोगों ने इस प्रकार की भ्रांति फैलाने का कार्य किया है कि महाभारत काल में सामाजिक पतन बहुत अधिक हो चुका था और लोग नारी को जुए में रखने या उसका चीरहरण […]
ओ३म् =========== वेदों के मर्मज्ञ व विख्यात विद्वानों में अपूर्व ऋषि दयानन्द सरस्वती ने वेदों पर आधारित आर्य-हिन्दुओं के पांच कर्तव्यों वा यज्ञों पर प्रकाश डाला है और इन यज्ञों को करने की पद्धति भी लिखी है। आर्य-हिन्दुओं के धर्म और संस्कृति का आधार किसी अल्पज्ञ मनुष्य की अविद्या से युक्त मान्यतायें नहीं है अपितु […]
—————————————– अध्याय 16 अवसर चूक गया बैरागी भाई परमानंद जी ने बंदा वीर बैरागी पर लिखते हुए कहा है : –” बंदा बैरागी यद्यपि साधु था फिर भी ऐसा जंगी नेता भारतवर्ष में कभी पहले न उत्पन्न हुआ था। उस दौर में कई वर्षों तक जहां कहीं भी युद्ध होता तो उसमें विजय प्राय: बंदा […]
ओ३म् ========= हमारा यह जगत ईश्वर के द्वारा रचा गया अथवा बनाया गया है। ईश्वर ने इस सृष्टि की रचना जीवों को जन्म व मृत्यु प्रदान करने के लिये की है। ईश्वर जीवात्माओं को जन्म इस लिये देता है कि जीवों ने पूर्वजन्मों या पूर्व कल्प में जो कर्म किये थे, उनका सुख व दुःख […]
1303 ईस्वी में जब अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के सुप्रसिद्ध किले पर आक्रमण किया तो उसके इस आक्रमण का लक्ष्य पद्मिनी को प्राप्त करना था। रानी पद्मिनी के रूप में भारत की अस्मिता की रक्षा करने के लिए उस समय अनेकों वीरों ने अपना बलिदान दिया । ऐसे ही एक बलिदानी गोरा थे। जिनका भतीजा […]
सितंबर 1924 में सावरकर जी से मौलाना शौकत अली ने भेंट की थी । उसने अपने बौद्धिक चातुर्य का परिचय देते हुए पहले तो सावरकर जी की भरपूर प्रशंसा की , पर फिर धीरे से ‘ शुद्धि कार्य ‘ को बंद करने की बात कह दी । इस पर सावरकर जी ने उससे भी स्पष्ट […]
================ पराधीनता के युग में अंग्रेज सरकार ने आर्यसमाज के प्रति कू्ररता का परिचय दिया था। इसके सदस्यों को अकारण परेशान किया जाता था। आर्यसमाजियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी और जो नौकरी में होते थे उन्हें नौकरी से किसी न किसी आरोप में निकाल दिया जाता था। वह आर्यसमाज के सत्संगों में भी […]
हैदराबाद में एक महिला के साथ हुए बलात्कार के प्रकरण ने देश को एक बार फिर सोचने के लिए बाध्य कर दिया है कि हम 21वीं सदी में रहकर भी महिलाओं के प्रति कितने अधिक बर्बर होते जा रहे हैं ? यद्यपि हम अपने आप को ‘सभ्य समाज ‘ का एक व्यक्ति होने का दंभ […]
नई दिल्ली । ( विशेष संवाददाता ) संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान और भारतीय संस्कृति के उद्भट प्रस्तोता के रूप में जाने जाने वाले डॉ सत्यव्रत शास्त्री का कहना है कि भारत की संस्कृति विदेशों में आज भी बहुत ही सम्मानित दृष्टि से देखी जाती है उन्होंने कहा कि भारत की वैदिक संस्कृति के […]