सितंबर 1924 में सावरकर जी से मौलाना शौकत अली ने भेंट की थी । उसने अपने बौद्धिक चातुर्य का परिचय देते हुए पहले तो सावरकर जी की भरपूर प्रशंसा की , पर फिर धीरे से ‘ शुद्धि कार्य ‘ को बंद करने की बात कह दी । इस पर सावरकर जी ने उससे भी स्पष्ट […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
================ पराधीनता के युग में अंग्रेज सरकार ने आर्यसमाज के प्रति कू्ररता का परिचय दिया था। इसके सदस्यों को अकारण परेशान किया जाता था। आर्यसमाजियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी और जो नौकरी में होते थे उन्हें नौकरी से किसी न किसी आरोप में निकाल दिया जाता था। वह आर्यसमाज के सत्संगों में भी […]
हैदराबाद में एक महिला के साथ हुए बलात्कार के प्रकरण ने देश को एक बार फिर सोचने के लिए बाध्य कर दिया है कि हम 21वीं सदी में रहकर भी महिलाओं के प्रति कितने अधिक बर्बर होते जा रहे हैं ? यद्यपि हम अपने आप को ‘सभ्य समाज ‘ का एक व्यक्ति होने का दंभ […]
नई दिल्ली । ( विशेष संवाददाता ) संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान और भारतीय संस्कृति के उद्भट प्रस्तोता के रूप में जाने जाने वाले डॉ सत्यव्रत शास्त्री का कहना है कि भारत की संस्कृति विदेशों में आज भी बहुत ही सम्मानित दृष्टि से देखी जाती है उन्होंने कहा कि भारत की वैदिक संस्कृति के […]
1857 की क्रांति न केवल भारत के राष्ट्रीय इतिहास के लिए अपितु आर्य समाज जैसी क्रांतिकारी संस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण वर्ष है । इस समय भारत के उस समय के चार सुप्रसिद्ध संन्यासी देश में नई क्रांति का सूत्रपात कर रहे थे। इनमें से स्वामी आत्मानंद जी की अवस्था उस समय 160 वर्ष […]
========== वैदिक धर्म सृष्टि का सबसे पुराना धर्म है। यह धर्म न केवल इस सृष्टि के आरम्भ से प्रचलित हुआ है अपितु इससे पूर्व जितनी बार भी प्रलय व सृष्टि हुई हैं, उन सब सृष्टि कालों में भी एकमात्र वैदिक धर्म ही पूरे विश्व में प्रवर्तित रहा है। इसका कारण यह है कि ईश्वर, जीव […]
आचार्य श्री विष्णु गुप्त मैं भेंड नहीं हूं, मैं शियार भी नहीं हूं , मैं गंवार नहीं हूं , मैं कानून से भी अनभिज्ञ नहीं हूं , मैं संविधान से भी अनभिज्ञ नहीं हूं। मैं भविष्य के खतरे से भी अनभिज्ञ नहीं हूं, मै पुलिस को सजा देने की कुप्रवृति का समर्थन नहीं कर सकता, […]
भारत में ध्वजा शब्द झंडे का पर्यायवाची है, प्राचीन काल में राज्यकर्मियों द्वारा उठाकर ले जाने वाली ध्वजा को राजा या सेना के प्रतीक रूप में परिभाषित किया गया है। शुद्घ शाब्दिक रूप में ध्वजा से तीन चीजों का बोध होता है- 1. पताका (हवा में फहराने वाला कपड़े या किसी अन्य वस्तु का टुकड़ा) […]
स्पष्ट तौर फर्जी सदस्यता और फर्जी कार्यकर्ताओं के दुष्परिणाम झेल रही है भाजपा। राज्यों में फर्जी कार्यकताओं और फर्जी सदस्यता का दुष्परिणाम यह निकल रहा है कि प्रदेशों में भाजपा अपनी साख लगातार खो रही है, भाजपा की सरकारें दफन भी हो रही हैं। राज्यों में भाजपा का जनाधार और लोकप्रियता लगातार गिर रही है,सिमट […]
डॉ राजेंद्र प्रसाद जब भारत के पहले राष्ट्रपति बने तो वह वास्तव में उस भारत के प्रतिनिधि थे जिस भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश ने लंबा संघर्ष किया था । वह संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे। अपनी शानोशौकत के लिए प्रसिद्ध रहे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की इच्छा नहीं […]