इतिहास एक पवित्र गंगा है। इसकी धारा शाश्वत है। सनातन है। इसमें निरंतरता है। इसकी प्रवाहमानता किसी राष्ट्र की संस्कृति और समाज की प्रवाहमानता को प्रमाणित करती है। यदि इतिहास की प्रवाहमानता कहीं बाधित , कुंठित या अवरुद्ध होती है तो समझो वह देश और समाज भी कहीं ना कहीं बाधित, कुंठित और अवरुद्ध होकर […]