कविता — 14 चर्चा हमारे उत्थान की संसार में सब ओर थी, हमारे ज्ञान और विज्ञान की धाक चहुंओर थी। हमारे सद्गुणों की कीर्ति पर संसार सारा मुग्ध था, विधाता के हाथ में हमारी नियति की डोर थी।। ऋषिगण हमारे उपनिषद में करते थे चर्चा ब्रह्म की, जीवन जगत के गंभीर प्रश्न और मानव धर्म […]
विश्व को अनुपम हमारी देन है,