मैं उस समय की बात कर रहा हूं जब मेरी उम्र10 या 12 वर्ष की रही होगी। पैतृक ग्राम महावड में हमारी ईख की फसल खड़ी हुई थी । पता नहीं किस कारण से उसमें एक किनारे से आग लग गई। पूज्य पिताजी , दोनों बड़े भाई साहब, सभी आग को बुझाने में लगे हुए […]
लेखक उगता भारत समाचार पत्र के चेयरमैन हैं।
मैं उस समय की बात कर रहा हूं जब मेरी उम्र10 या 12 वर्ष की रही होगी। पैतृक ग्राम महावड में हमारी ईख की फसल खड़ी हुई थी । पता नहीं किस कारण से उसमें एक किनारे से आग लग गई। पूज्य पिताजी , दोनों बड़े भाई साहब, सभी आग को बुझाने में लगे हुए […]
सोनिया ने पर्दे के पीछे किस कदर लूट की होगी ? सोचिये… तब 40 करोड़ के लिए सोना गिरवी रखा था… जबकि 64 करोड़ की दलाली तो सिर्फ बोफोर्स में खाई गयी थी… RBI गवर्नर रहे Y.V रेड्डी की पुस्तक ADVISE AND DECENT से साभार… काँग्रेस के शासनकाल में सिर्फ 40 करोड़ रुपए के […]
भारतीय धर्म संस्कृति और इतिहास की पवित्रता में विश्वास रखने वाले हम सब भारतवासियों के लिए यह बहुत गर्व और गौरव का विषय है कि भारत ने विश्वगुरु के रूप में एक समय सारे विश्व को मर्यादा व्यवस्था और शांति का पाठ पढ़ाया था। भारत के विश्व गुरु रहते हुए संपूर्ण संसार व्यवस्थित रहा। […]
अधिकांशतः राजपूत मुगलों से हारते ही क्यों थे?? भले ही राजपूत महान योधा और तलवार बाज़ी करते थे| असल बात ये है कि हमें वही इतिहास पढ़ाया जाता है, जिनमें हम हारे हैं मेवाड़ के राणा सांगा ने 100 से अधिक युद्ध लड़े, जिनमें मात्र एक युद्ध में पराजित हुए और आज उसी एक युद्ध […]
10 मई 1857 की प्रातः कालीन बेला। स्थान मेरठ । जिस वीर नायक ने इस पूरे स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण एवं क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी वह अमर शहीद धन सिंह कोतवाल चपराना निवासी ग्राम पाचली मेरठ थे। क्रांति का प्रथम नायक धनसिंह गुर्जर कोतवाल। नारा था – ‘मारो फिरंगियों को।’ मेरठ में ईस्ट इंडिया कंपनी […]
10 मई 1857 की प्रातः कालीन बेला। स्थान मेरठ । जिस वीर नायक ने इस पूरे स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण एवं क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी वह अमर शहीद धन सिंह कोतवाल चपराना निवासी ग्राम पाचली मेरठ थे। क्रांति का प्रथम नायक धनसिंह गुर्जर कोतवाल। नारा – ‘मारो फिरंगियों को।’ मेरठ में ईस्ट इंडिया कंपनी की […]
कुछ विद्वान साथी ऐसा भी सुझाव दे रहे हैं कि कोरोना की वर्तमान वैश्विक महामारी (जो हमारे देश भारतवर्ष में भी फैली हुई है ) की भयावहता की जानकारी सोशल मीडिया पर अधिक न दी जाए, जिससे कि भय का वातावरण कम से कम निर्मित हो पाए और समाज में सकारात्मकता का वातावरण उत्पन्न […]
आलोचना ,समीक्षा और निंदा यह तीनों शब्द समानार्थक से प्रतीत होते हैं यद्यपि तीनों शब्दों में मौलिक अंतर है। तीनों शब्दों का एक विस्तृत आयाम है। एक शब्द होता है लोचन, उसी से जब ‘आ’ प्रत्यय हुआ तो वह आलोचन हो गया। लोचन का अर्थ है देखना। इसी से आलोचना शब्द की उत्पत्ति होती […]
चंद्रशेखर, पूर्व प्रधानमंत्री 1980 में लोकसभा का चुनाव हुआ। बाबू जगजीवन राम पार्टी के नेता थे। जनता पार्टी के टूटने से लोगों का उससे मोहभंग हुआ और इंदिरा गांधी की वापसी निश्चित थी। बाबू जगजीवन राम को नेता बनाने के मोरारजी भाई खिलाफ थे। मैं भी उनके नाम से सहमत नहीं था। चुनाव के […]
गतांक से आगे… कृष्ण यजुर्वेद के तैत्तिरीय ब्राह्यण में लिखा है कि ‘वाचे पुरुषमालभते’ इस पर सायणाचार्य भाष्य करते हुए लिखते हैं कि, ‘वाग्देवतायै पुरुषं पूरकं स्थूलशरीरमित्यर्थ: अर्थात् वाणी के देवता के लिए पुरुष का वध करें। उसी में फिर लिखा है कि ‘ ब्राह्मणे ब्राह्मणमालभते’ इस पर सायणाचार्य कहते हैं कि ‘ब्राह्मणजात्याभिमानी देवसत्यस्मै कञ्चित् […]