राष्ट्र हम सबकी भावनाओं का आईना होता है। इस पर हर उस व्यक्ति का अधिकार होता है जो अपने देशवासियों की उन्नति में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं डालता है और जो शान्तिपूर्ण जीवन जीने में स्वाभाविक रूप से विश्वास रखता है। ऐसे व्यक्ति का मजहब, जाति, सम्प्रदाय चाहे जो हो उसके लिए राष्ट्र […]
Author: अमन आर्य
प्रसन्नता व संपन्नता के प्रतीक प्रकाश पर्व की सकारात्मकता को अपनाये देश भारत की संस्कृति अंधकार से प्रकाश की ओर चलने की उपासिका रही है। सृष्टि के प्रारम्भ में जब अंधकार ही अंधकार था-तब ईश्वर ने उस अंधकार को मिटाने के लिए पहला दीप सूर्य के रूप में जलाया। अंधकार हटा और प्रकाश फैल […]
रायसीना हिल्स पर बना राष्ट्रपति भवन गणतांत्रिक भारत के हर ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना है। आजादी से पूर्व इसे ‘वायसरीगल हाउस’ के नाम से जाना जाता था। लेकिन 26 जनवरी 1950 को सुबह 10.15 बजे जब डा. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेकर गणतांत्रिक भारत के राजपथ पर […]
ऋषि दयानन्द के जीवन एवं कार्यों का देश व विश्व में समुचित व यथार्थ मूल्यांकन नहीं हुआ है। इसका प्रमुख कारण लोगों की सत्य जानने के प्रति उपेक्षा, स्व-स्व मत-मतान्तरों के प्रति अनुचित आदर भाव और भौतिक सुखों की प्राप्ति आदि प्रमुख कारण प्रतीत होते हैं। यदि देश व विश्व के लोगों में सत्य के […]
भारत प्राचीन काल से योगगुरू रहा है। इसके ‘योग’ में जीवन व्यवस्था है, जिसे अपनाकर व्यक्ति निरोग रह सकता है और शोकमुक्त हो सकता है। हमारे ऋषि पतंजलि ने प्राचीनकाल में हमें योगदर्शन दिया। जिसे अपनाकर भारत ने दीर्घकाल तक योग के क्षेत्र में संसार का मार्गदर्शन किया। वर्तमान में ऋषि पतंजलि के ऋषि […]
देश की राजनीति में और देश के हर राजनीतिक दल में कुछ ऐसे लोग हुआ करते हैं जिन्हें लोकमान्यता तो प्राप्त नहीं होती-पर वे सत्ता सुख भोगने में सफल हो जाते हैं। हमारी संविधान प्रतिपादित लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे छिद्र हैं जिनमें से कुछ लोग देश के लोकतंत्र के पावन मंदिर संसद के ऊपरी सदन […]
आवश्यकता है पत्रकारिता को पहचानने की
राकेश आर्य (बागपत) एक समय था जब हम किसी समाचार के लिए कहते थे कि अमुक बात समाचार पत्र में आई है, अत: इस पर शक करने की कोई गुंजाइश नहीं है, परंतु समय के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी गिरावट आई है और यहां भी कुछ पेशेवर लोग घुस आये हैं। ‘पत्रकारिता दिवस’ […]
खतरा बनते जा रहे हैं फर्जी बाबा
भारत में समस्या यह है कि इस तरह के बाबाओं से कैसे निपटा जाए, जबकि सरकारें उनका समर्थन कर रही होती हैं। ऐसे बाबा लोग भले ही एक बड़ा वोट बैंक बनाते हैं, परंतु वे राज व्यवस्था को ऐसी क्षति पहुंचाते हैं जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। लोकतंत्र मतदाताओं व दलों में सीधे […]
पौराणिक मान्यतानुसार सृष्टि पालक भगवान विष्णु अब तक अधर्म के नाश के लिए नौ बार यथा मत्स्य, कुर्म (कच्छप), वाराह, नृसिंह (नरसिम्हा), वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध के रूप में धरती पर अवतरित हो चुके हैं और दसवीं बार भविष्य में कलियुग की समाप्ति पर कल्कि अवतार के रूप में अवतरित होंगे। इन सभी अवतारों […]
बाबाओं के पास जो भीड़ जमा होती है, उसके मूल में दुख है, अभाव है, गरीबी है या अशांति है। कोई बेटे से परेशान है, कोई बहू से, कोई नौकरी से, कोई जमीन के झगड़े में फंसा है और किसी को कोर्ट-कचहरी के चक्कर में जायदाद बेचनी पड़ गई है। या तो धन ही नहीं […]