नये भारत के निर्माण की नींव में बैठा इंसान सिर्फ हिंसा की भाषा में सोचता है, उसी भाषा मेें बोलता है और उससे कैसे मानव जाति को नष्ट किया जा सके, इसका अन्वेषण करता है। बदलते परिवेश, बदलते मनुज-मन की वृत्तियों ने उसका यह विश्वास और अधिक मजबूत कर दिया कि हिंसा हमारी नियति है, […]
Author: अमन आर्य
चीनी भाषा अध्ययन है, कठोर परिश्रम: भा. (१)
डॉ. मधुसूदन: मौलिक सारांश: संसार की कठिनतम भाषा है चीनी. कठोर परिश्रम से ही, चीनी अपनी भाषा सीखते हैं. शालेय शिक्षा के दस वर्ष प्रति-दिन ३०% से अधिक समय चीनी भाषा सीखने में लगाते हैं. इस भाषा में भूत, भविष्य और वर्तमान काल दर्शाए नहीं जा सकते. नवीन शब्द रचना भी अति कठिन है. ऐसी […]
वरूण क्वात्रा यूं तो डॉक्टर हमेशा ही लोगों को मौसमी फलों का सेवन करने की सलाह देते हैं, लेकिन आमतौर पर लोग इनके फायदों से अनजान ही होते हैं। चूंकि अब सर्दियों के मौसम ने दस्तक दे दी है और बाजार में संतरे भी दिखने लगे हैं तो क्यों न अब संतरों का सेवन भी […]
देश के लगभग एक हजार केंद्रीय विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को संस्कृत और हिंदी में प्रार्थना कराई जाती हैं। वर्षों से यह प्रार्थनाएं हो रही हैं। परंतु, आज तक देश में कभी विद्यालयों में होने वाली प्रार्थनाओं पर विवाद नहीं हुआ। कभी किसी को ऐसा नहीं लगा कि प्रार्थनाओं से किसी धर्म विशेष का प्रचार […]
भारत जैसे धर्मप्रधान और तीज-त्योहारों वाले देश में होली अनूठा एवं अलौकिक त्योहार है, यह लोक पर्व है, मनुष्यता का पर्व है, समाज का पर्व है, संस्कृति का पर्व है एवं यह बंधनमुक्ति का पर्व है। इसमें आप समाज को सर्वोपरि मनाने की घोषणा करते हैं। यह विशुद्ध मौज-मस्ती व मनोरंजन का सांस्कृतिक त्योहार है। […]
चलती फिरती जेल या अँधा-इंसाफ़ ?
चार चार बेगमों का, हक मर्दों को. और चलती-फिरती जेल,*बेगम को . मूँद कर आँख इक रोज़ बेगम बन जा. पहन कर बुरका ज़रा संसद* हो आ. अण्डे* से बाहर निकल कर देख. आँखों से, हरा चष्मा उतार कर देख. (अण्डा= दकियानूसी रुढियाँ) बुरका नहीं, है ये, चलती फिरती जेल है; हिम्मत है, चंद रोज़ […]
दीपक गिरकर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की हालिया रिपोर्ट बताती है कि एक किसान परिवार खेती से औसतन 3078 रुपए ही कमा पाता है। जबकि सीएसडीएस के आंकड़े बताते हैं किबासठ फीसद किसान खेती छोडऩा चाहते हैं। ये दोनों आंकड़े किसानों और कृषिक्षेत्र की दुर्दशा की तरफ ही इशारा करते हैं। लेकिन कृषि ऋण की […]
कुदरत ने इंसान को जीवन के आधार तत्व पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि में समाहित असंख्य नियामतें बख्शी हैं जो मुफ्त होने के साथ लाजवाब भी हैं। हालांकि हमने अपने स्वार्थ साधने के लिए सभी तरह की प्राकृतिक संपदाओं का मनमाने ढंग से उपयोग किया है फिर भी सब कुछ सहते हुए मां प्रकृति […]
भारतीय सांस्कृतिक जीवन में मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम को जो महत्व प्राप्त है, वही स्थान उनकी अद्र्धांगिनी सीता माता को भी प्राप्त है तथा जिस प्रकार समाज में रामनवमी का महात्म्य है, उसी प्रकार जानकी नवमी या सीता नवमी का भी महात्म्य माना जाता है । लोक मान्यतानुसार सीता नवमी के पावन पर्व पर व्रत रख […]
अच्छे जीवन की चाहत से धोखा
मनीषा सिंह हमारे समाज में यह ग्रंथि लंबे समय से बनी हुई है कि विदेश का मतलब जीवन से लेकर हर चीज में गुणवत्ता की गारंटी है। हजारों परिवारों में यह चाहत दिखाई देती है कि काश, उनकी लडक़ी की शादी विदेश में बसे किसी भारतीय से हो जाए। लेकिन इस सपने की सच्चाई यह […]