कहावत है कि जैसा राजा होता है वैसी प्रजा होती है। यह बात बहुत पहले चाणक्य ने कही थी। यदि यह बात अक्षरश: आज देश में लागू हो जाए तो सचमुच प्रलय आ जाएगी और उस प्रलय में हम सब बह जाएंगे। बात यह है कि भारत की केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ […]
Author: अमन आर्य
माँ का ऋण चुकाना कठिन है
पूजनीया माताजी श्रीमति सत्यवती आर्या जी की 12वीं पुण्यतिथि 18 मार्च 2018 पर विशेष मातृ-पितृ ऋण हमारे ऊपर सबसे अधिक माना गया है। संसार में आकर सबसे पहले मां हमको संसार और संसार वालों के बारे में सूचना देती है, बताती है कि कौन व्यक्ति तुम्हारा क्या लगता है? इस प्रकार पिता से भी सबसे […]
मेघालय में लोकतन्त्र की हत्या
त्रिपुरा और नागालैंड की जनता के जनादेश के आधार पर भाजपा को वहाँ अपनी सरकार के गठन करने का पूर्ण अधिकार है। लेकिन मेघालय में जो कुछ हुआ या हो रहा है उसे लोकतन्त्र की मर्यादाओं के अनुकूल नहीं कहा जा सकता। वहाँ पर जनमत या जनादेश भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए […]
शौक की सेल्फी का जानलेवा होते जाना
विश्व की उभरती हुई गंभीर समस्याओं में प्रमुख है मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी लेना। इन दिनों मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी यानी अपनी तस्वीर खुद उतारने के शौक के जानलेवा साबित होने की खबरें आए दिन सुनने को मिल रही हैं। नई पीढ़ी इस जाल में बुरी तरह कैद हो गयी है। आज हर […]
आधुनिक वेदना
देखो ये आ गये हाथों में मोबाइल सेट बालों में जेल । पतली सी उँगलियाँ बड़े- बड़े नेल ।। लोक लाज मर्यादा बिल्कुल हैं खा गये । देखो ये आ गये। […]
आइए, जानें अपने संविधान के बारे में
सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसका अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत कोस्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाता, […]
बाल मजदूरी की फैलती जा रही हैं जड़ें
देवेंद्र जोशी भारत में बालश्रम एक समस्या तो है लेकिन विडंबना यह है कि यहां पहले से ही यह मान कर चला जाता है कि बच्चे इसलिए मजदूरी करते हैं कि इससे उनके परिवार का खर्च चलता है। यह तर्क अपने आप में इसलिए छलावा है कि इसको सच मान लेने का मतलब तो यह […]
टीआरपी की ख़बरों का मिडिया
जब समाज की तरफ से आवाज आती है कि मीडिया से विश्वास कम हो रहा है या कि मीडिया अविश्वसनीय हो चली है तो सच मानिए ऐसा लगता कि किसी ने नश्चत चुभो दिया है. एक प्रतिबद्ध पत्रकार के नाते मीडिया की विश्वसनीयता पर ऐसे सवाल मुझ जैसे हजारों लोगों को परेशान करते होंगे, हो […]
प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी के दिन को भारत में गणतंत्र दिवस रूप में मनाया जाता है और भारत द्वारा प्रत्येक गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसी व्यक्ति को मुख्य अथिति के रूप में आमंत्रित किया जाता है तो आइये जानते हैं अब तक गणतंत्र दिवस पर रहे मुख्य अतिथियों की सूची 2017 – शेख […]
नये भारत के निर्माण की नींव में बैठा इंसान सिर्फ हिंसा की भाषा में सोचता है, उसी भाषा मेें बोलता है और उससे कैसे मानव जाति को नष्ट किया जा सके, इसका अन्वेषण करता है। बदलते परिवेश, बदलते मनुज-मन की वृत्तियों ने उसका यह विश्वास और अधिक मजबूत कर दिया कि हिंसा हमारी नियति है, […]