प्राचीन काल का मानव 5000 वर्षों तक जिंदा रह लेता था

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अनिरुद्ध जोशी

प्राचीन और मध्यकाल में हस्तलिखित दस्तावेज बहुत होते थे। उनमें से लाखों तो लुप्त हो गए या जला दिए गए। फिर भी हजारों आज भी किसी लाइब्रेरी में, संग्रहालय, आश्रम में या किसी व्यक्ति विशेष के पास सुरक्षित है। ऐसी ही एक हस्तलिखित पांडुलिपि या किताब इंदौर के रहने वाले साधारण से व्यक्ति नरेंद्र चौहान के पास सुरक्षित है। इस पांडुलिपि या किताब में पांच हजार नहीं बल्कि 84 हजार वर्षों तक जिंदा बने रहने के नुस्खे लिखे हैं। हालांकि इसमें कितनी सचाई है यह तो उक्त पांडुलिपि पर शोध किए जाने के बाद ही पता चलेगी। आप भी वीडियो देखें और जानें कि आखिर कैसे और किस विधि से व्यक्ति 5 हजार वर्षों तक जिंदा रह सकता है।

आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार मनुष्य की आयु लगभग 120 वर्ष बताई गई है लेकिन वह अपने योगबल से लगभग 150 वर्षों से ज्यादा जी सकता है। कहते हैं कि प्राचीन मानव की सामान्य उम्र 300 से 400 वर्ष हुआ करती थी, क्योंकि तब धरती का वातावरण व्यक्ति को उक्त काल तक जिंदा बनाए रखने के लिए था।

यदि यह सिद्ध हो जाता है कि प्राचीन मानव कम से कम 500 वर्षों तक आसानी से जिंदा रह सकता था तो हमें इतिहास को फिर से लिखना होगा। वंशानुक्रम में तारीखों को बदलना होगा। वर्तमान में इंसान अधिक से अधिक 100 वर्ष जी सकता है। प्राकृतिक रूप से व्यक्ति की उम्र 125 वर्ष तक ही हो सकती है। फ्रांस की रहने वाली जीन कालमेंट 122 वर्ष तक जिंदा रही थीं। वर्तमान में भारत में सबसे उम्रदराज वर्तमान में हिन्दू संन्यासी स्वामी शिवानंद हैं जिनकी उम्र 120 वर्ष की है। वे अभी भी स्वस्थ हैं।

हिंदू पुराणों के अनुसार अश्‍वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि के अलावा अन्य कई ऐसे लोग हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे आज भी जीवित हैं। क्या यह संभव है कि कोई व्यक्ति हजारों वर्ष तक जीवित रह सकता है? रामायण काल के परशुराम और जामवंत महाभारत में भी नजर आते हैं।

बाइबल के मुताबिक आदम 930 साल, शेत 912 साल और मतूशेलह 969 साल जीए थे यानी मतूशेलह अगर 31 साल और जीता, तो पूरे 1,000 साल का हो जाता! (उत्पत्ति 5:5,8,27) इस तरह नूह या नोहा 950 वर्ष तक जिंदा रहे थे। नूह और वैवस्वत मनु की कहानी मिलती-जुलती है।

भारत में देवहरा बाबा के बारे में दावा किया जाता है कि वे 750 वर्ष तक जिंदा रहे। उनकी मौत 1990 में हो गई थी। त्रैलंग स्वामी जिन्हें ‘गणपति सरस्वती’ भी कहते हैं, उनकी उम्र 286 वर्ष की थी। त्रैलंग स्वामी का जन्म नृसिंह राव और विद्यावती के घर 1601 को हुआ था। वे वाराणसी में 1737-1887 तक रहे। इसी तरह शिवपुरी बाबा थे, जो 27 सितंबर 1826 में जन्मे और जनवरी 1963 में उन्होंने देह त्याग दी। बंगाल के संत लोकनाथजी का जन्म 31 अगस्त 1730 को हुआ और 3 जून 1890 को उन्होंने देह छोड़ दी।

क्या कहता है वैज्ञानिक?
आपने अमरबेल का नाम सुना होगा। विज्ञान चाहता है कि मनुष्य भी इसी तरह का बन जाए, कायापलट करता रहा और जिंदा बना रहे। वैज्ञानिकों का एक समूह चरणबद्ध ढंग से इंसान को अमर बनाने में लगा हुआ है। समुद्र में जेलीफिश (टयूल्रीटोप्सिस न्यूट्रीकुला) नामक मछली पाई जाती है। यह तकनीकी दृष्टि से कभी नहीं मरती है। हां, यदि आप इसकी हत्या कर दें या कोई अन्य जीव जेलीफिश का भक्षण कर ले, फिर तो उसे मरना ही है। इस कारण इसे इम्मोर्टल जेलीफिश भी कहा जाता है। जेलीफिश बुढ़ापे से बाल्यकाल की ओर लौटने की क्षमता रखती है। अगर वैज्ञानिक जेलीफिश के अमरता के रहस्य को सुलझा लें, तो मानव अमर हो सकता है।

वैज्ञानिक अमरता के रहस्यों से पर्दा हटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयों और सर्जरी का विकास किया जा रहा है। अब इसमें योग और आयुर्वेद को भी महत्व दिया जाने लगा है। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के बारे में आयोजित एक व्यापक सर्वे में पाया गया कि उम्र बढ़ाने वाली ‘गोली’ को बनाना संभव है। रूस के साइबेरिया के जंगलों में एक औषधि पाई जाती है जिसे जिंगसिंग कहते हैं। चीन के लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करके देर तक युवा बने रहते हैं।

‘जर्नल नेचर’ में प्रकाशित ‘पजल, प्रॉमिस एंड क्योर ऑफ एजिंग’ नामक रिव्यू में कहा गया है कि आने वाले दशकों में इंसान का जीवनकाल बढ़ा पाना लगभग संभव हो पाएगा। अखबार ‘डेली टेलीग्राफ’ के अनुसार एज रिसर्च पर बक इंस्टीट्यूट, कैलिफॉर्निया के डॉक्टर जूडिथ कैंपिसी ने बताया कि सिंपल ऑर्गनिज्म के बारे में मौजूदा नतीजों से इसमें कोई शक नहीं कि जीवनकाल को बढ़ाया-घटाया जा सकता है।

पहले भी कई स्टडीज में पाया जा चुका है कि अगर बढ़ती उम्र के असर को उजागर करने वाले जिनेटिक प्रोसेस को बंद कर दिया जाए, तो इंसान हमेशा जवान बना रह सकता है। जर्नल सेल के जुलाई के अंक में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती उम्र का प्रभाव जिनेटिक प्लान का हिस्सा हो सकता है, शारीरिक गतिविधियों का नतीजा नहीं। खोज और रिसर्च जारी है…।

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