*चीर से कृष्ण बना डाला, चरित्र से कब बनाओगे*?

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लेखक
आर्य सागर खारी तिलपता ग्रेटर नोएडा

आज वैदिक काल गणना के अनुसार योगेश्वर श्री कृष्णा विषयक उपलब्ध प्राचीन साहित्य महाभारत आदि की साक्षी के आधार पर योगीराज श्री कृष्ण का 5254 वा जन्मोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है लेकिन क्या हम सच्चे स्वरूप में गीता के उपदेशक ,महाभारत के नायक के जन्मदिवस को मनाते हैं|

महान क्रांतिकारी लेखक पत्रकार लाला लाजपत राय ने योगेश्वर श्री कृष्ण के जीवन के संबंध में लिखी गई अपनी पुस्तक में लिखा है—!

दुनिया के महापुरुषों पर उनके विरोधियों ने अत्याचार किए झूठी तोहमत लगाई ,चरित्र को कलंकित किया लेकिन श्री कृष्ण भगवान पर उनके भक्तों के द्वारा ही अत्याचार किया गया है, चरित्र पर लांछन लगाए हैं

कोई श्री कृष्ण को माखन चोर बतलाता है ,तो कोई नहाती हुई गोपियों के वस्त्र चुराने वाला बतलाता है, कोई कहता है श्री कृष्ण के 16000 पत्नियां थी, तो कोई कहता है श्रीकृष्ण ने कुब्जा दासी के साथ समागम किया| शर्म आनी चाहिए हमको योगीराज श्रीकृष्ण पर झूठे अश्लील आचरण का आरोप लगाने के लिए |

यह सब अनाचारी पाखंडी कथावाचकों की करतूत है उन्होंने श्री कृष्ण के चरित्र को गलत तरीके से पेश किया है ,अपने दुष्ट कर्मों, अनाचार को भक्ति सिद्ध करने के लिए | आप महाभारत को पढ़ेंगे तो ऐसा कोई उल्लेख नहीं है जिससे श्री कृष्ण के चरित्र पर कोई उंगली भी उठा सके , महाभारत काल के सभी ऋषि महर्षियों, योद्धा, राजा ,महाराजाओं में सबसे उत्तम चरित्र योगीराज श्री कृष्ण महाराज का ही था। राजसूय यज्ञ में वह अग्रपूजा के वह अधिकारी बने जबकि महर्षि व्यास भी उस सभा में उपस्थित थे|

श्री कृष्ण महाराज के पावन चरित्र से हमने क्या प्रेरणा ली दुनिया के 6000 साल के इतिहास में चाहे यूनानी सभ्यता हो रोम, मिश्र की सभ्यता हो इतना उज्ज्वल पावन चरित्र किसी भी राज्य पुरुष का नहीं रहा।

25 अगस्त 2024 की दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड छत्तीसगढ़ में प्रत्येक 100 में से चार व्यक्ति ईसाई बन रहा है प्रतिदिन ।जेशुआ के नाम से अमेरिकी संस्था उसके द्वारा पोषित प्रचार, पास्टर पादरी के पीपीपी मॉडल के अनुसार लोगों को धन रोजगार विवाह का प्रलोभन देकर इसाई बना रही है।

ईसाई पादरी पास्टर भोले भाले लोगों से यही कहते हैं कि देखिए आपका भगवान श्री कृष्णा जिसके विषय में हम नहीं रहते आपके ही कथावाचक कहते हैं कि उसने नहाती हुई गोपियों के वस्त्र चुराए थे वह रासलीला करता था महिलाओं के वस्त्र चुराकर पेड़ पर चढ़ जाता था और एक तरफ हमारा परमात्मा का पुत्र यीशु जो लोगों के पापों के लिए खुद सुली पर चढ़ गया तो आप बताइए कौन अच्छा है जो पापों के लिए सुली पर चढ़ गया या जो महिलाओं के वस्त्र चुराकर पेड़ों पर चढ़ गया ऐसे कुतर्क जब भोले भाले लोगों से ईसाई लोग करते हैं तो साधारण लोगों की मनो स्थिति बदल जाती है ।

श्री कृष्ण भगवान का पूरा जीवन अधर्म के नाश तथा धर्म की स्थापना में चला गया 21 वर्ष की की आयु में कंस को मार विधिवत शिक्षा 13 वर्ष में संदीपन ऋषि के आश्रम में पूरी करने के ………… पश्चात…. मगध के शक्तिशाली राजा जरासंध की चुनौती मिल गई जो आए दिन मथुरा पर आक्रमण करता था 100 राजाओं की नर बलि देने का जिसने प्रण ले रखा था फिर भीम के सहयोग से उसको मारा| 12 वर्ष के घोर ब्रह्मचर्य के पालन से प्रद्युम्न जैसी तेजस्वी संतान उत्पन्न की |

जब जीवन में कुछ सुख का समय आया इसके पश्चात कौरव पांडवों का महासंग्राम छिड़ गया जिसे रोकने का भी अपनी राजनीति से टालने पूर्ण प्रयास योगीराज श्री कृष्ण ने किया|बाद के घटना क्रम से तो सभी परिचित ही हैं योगेश्वर कितने आहत हुए थे महाभारत की लड़ाई में आर्यावर्त के महाबली राजा महाराजा महर्षियों के नरसंहार से।

कथावाचको ने राधा नाम की महिला को योगेश्वर श्रीकृष्ण से जोड़ दिया , महर्षि वेदव्यास की मूल कृति महाभारत में कहीं भी राधा नाम का जिक्र नहीं है |

श्री कृष्ण एक पत्नीव्रत धारी थे उनकी केवल रुकमणी एक ही पत्नी थी,उनका ही महाभारत में जिक्र मिलता है|

अब आप ही बताइए कि क्या ऐसा महापराक्रमी , सुदर्शन चक्र धारी श्री कृष्ण अनाचारी, माखन चोर हो सकता है क्या वह नहाती हुई महिलाओं के वस्त्र चुरा सकता है उस काल में|

जिस नंद के यहां श्री कृष्ण का लालन-पालन हुआ वह यादव राजा वासुदेव का परम मित्र था उसके पास 900000 गाय थी गोकुल में जिसके घर में 900000 गाय हो क्या वह दूसरों का माखन चुरा लेगा ,अपनी बुद्धि से विचार कीजिए|

योगीराज श्री कृष्ण राजनीति शास्त्र ,कूटनीति युद्ध शास्त्र War_tactics ,मल्लविद्या के महान ज्ञाता थे| आज जब भारत वर्ष में षड्यंत्र के बादल मंडरा रहे हैं हमें योगीराज के इसी पराक्रमी चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए| अपने सुकुमार बच्चों को अपने मनोविनोद के लिए श्री कृष्ण के कपड़े या मोरध्वज की वेशभूषा में ना सजाइए ,भगवान श्री कृष्ण के पावन चरित्र से उनको अवगत कराइए| भारतीय संस्कृति में चित्र की नहीं चरित्र की पूजा की गई है सदियों से| हमारे अज्ञान के कारण महाभारत का नायक दही हांडी फेस्टिवल, फैंसी ड्रेस कंपटीशन पर सिमट कर रह गया है इस आज के इंडिया में, कुछ बच्चे तो श्री कृष्ण को कार्टून करैक्टर मात्र ही मानते हैं इसमें दोष बच्चों का नहीं हमारा है ,विचार कीजिए|

महाभारत के आधार पर श्री कृष्ण के यथार्थ चरित्र का परिचय अपने बच्चों को कराना होगा। इस दिन विशेष गोष्ठी, यज्ञ, वेद उपनिषद महाभारत के गीता वेदांत आदि दर्शनों पर बौद्धिक चर्चाएं होनी चाहिए।

आर्य सागर खारी✒✒✒

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