राम और भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

images (41)

राम हमारी आस्था राम हमारे मूल।
रामचरित गाते रहो मिटेंगे संशय शूल।।

जब अयोध्या धाम में संपन्न हुए श्री राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली लौटे तो भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आस्था व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें स्पष्ट किया गया कि देश के लोगों ने जिस प्रकार प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रति अपना प्यार और स्नेह समर्पित किया है, उसके चलते वह एक ‘जननायक’ के रूप में स्थापित हुए हैं।
वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी जनाकांक्षाओं पर खरे उतरे हैं और उन्होंने अनेक प्रकार के संकटों को पार करते हुए हर चुनौती को स्वीकार किया है। अनेक समस्याओं के समाधान खोजे हैं और धारा 370 को हटाने जैसी कई ऐसी जटिल समस्याओं को सुलझाने का कीर्तिमान स्थापित किया है जिन्हें सुलझाना देश की राजनीति अपने लिए असंभव मान चुकी थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के व्यक्तित्व की इन्हीं विशिष्टताओं को इंगित करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन्हें नये युग का ‘अग्रदूत’ कहा।
प्रधानमंत्री श्री मोदी देश की नब्ज पर हाथ रखकर काम करने वाले प्रधानमंत्री हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उनकी कार्यशैली को अपने शब्दों में बांधते हुए स्पष्ट किया कि उनके रहते देश निरंतर प्रगति पथ पर आरूढ़ है। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि “हम कह सकते हैं कि 1947 में इस देश का शरीर स्वतंत्र हुआ था और अब इसमें आत्मा की प्राण-प्रतिष्ठा हुई है। निश्चित ही मोदी अब इस नए युग के प्रवर्तन के बाद, नवयुग प्रवर्तक के रूप में भी सामने आए हैं। श्रीरामलला के नूतन विग्रह में प्राण-प्रतिष्ठा की अपूर्व एवं अलौकिक घटना भारत के लिये युगांतरकारी है। हम एक नये युग में पदार्पण कर रहे हैं। यह नवयुग एवं नया दौर आशा और विश्वास के साथ ही जिम्मेदारियों से भरा है।”
वास्तव में जननायक या राष्ट्रनायक वही व्यक्ति या नेता हो सकता है जो राजनीति के स्थान पर राष्ट्रनीति में विश्वास रखता हो। जिसके मानस की सारी चेतनाएं केवल राष्ट्र रुपी शरीर के लिए काम करती हों। जो राष्ट्र के लिए जीता हो, राष्ट्र के लिए समर्पित हो और जिसके मनन, चिंतन और अध्ययन में केवल राष्ट्र ही रहता हो । जो राष्ट्र की चिंता करता है, चिंतन करता है वही समर्पित व्यक्तित्व राष्ट्र नायक होता है। राजनेता होता है। कभी-कभी वह तात्कालिक लाभ के लिए राजनीति करता है, पर उसका स्थायी और मौलिक स्वभाव केवल और केवल राष्ट्र के भविष्य के लिए योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने में लगा होता है।
नरेन्द्र मोदी का महान एवं ऊर्जस्वल व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगा। यदि उन्हें अपने राजनीतिक जीवन में प्रधानमंत्री के रूप में काम करने के मात्र 10 वर्ष ही मिले मान लिए जाएं तो भी वह इतना अधिक कुछ कर चुके हैं कि इतिहास को उनका महिमामंडन करना ही पड़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपने शासनकाल में ऐसी परिस्थितियां निर्मित कीं जिनके चलते न्यायालय को निर्बाध सुनवाई करने और निडर होकर काम करने का अवसर उपलब्ध हुआ । इसके अतिरिक्त शासन प्रशासन को भी राम मंदिर के निर्माण के प्रति अपनी संकल्प शक्ति को व्यक्त करने के लिए बाध्य होना पड़ा। सभी ने यह स्वीकार कर लिया कि देश के लिए और देश की युवा पीढ़ी के लिए राम मंदिर का अस्तित्व में आना नितांत आवश्यक है। इससे न केवल इतिहास के पापों का प्रक्षालन होगा बल्कि देश के भविष्य को भी सुधारने, संवारने और सजाने में भी सफलता प्राप्त होगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बोलते हुए कहा  ‘यह नये इतिहास-चक्र की भी शुरुआत’ है। उनके इस वक्तव्य का अर्थ है कि भारत नई छलांग लगाने के लिए तैयार है। राम मंदिर के निर्माण से भारत नई संभावनाओं के आकाश को छूता हुआ दिखाई दे रहा है। इतिहास के उस गौरवपूर्ण कालखंड की पुनरावृत्ति करने के लिए भारत अब अपने अंतर्मन से तैयार है जिसमें अनेक प्रकार के ज्ञान विज्ञान भरे आविष्कार हुआ करते थे। विभिन्न प्रकार की कलाओं को राजकीय संरक्षण मिलता था और देश के लोगों का चारित्रिक उत्थान करना देश की सरकारों का पहला और सबसे बड़ा कार्य होता था। राम राज्य का अभिप्राय भी यही है कि हम राष्ट्र के लिए राष्ट्र के सुसंस्कृत मानव समाज का निर्माण करें। व्यक्तियों के या नागरिकों के ढेर का नाम राष्ट्र नहीं है, बल्कि सुसंस्कृत और सुसभ्य तथा ऐसे लोगों के साथ-साथ रहने से राष्ट्र बनता है जो इहलौकिक और पारलौकिक उन्नति में विश्वास रखते हों और अधिकार से अधिक कर्तव्य को वरीयता देते हों।
इस अवसर पर दिये गये संबोधन में मोदी ने अपने संकल्प ‘सबका साथ, सबका विकास और सबके विश्वास’ को एक नई व्याख्या दी। उन्होंने सारे राष्ट्रवासियों का आवाहन करते हुए और उनके भीतर नवचेतना का संचार करते हुए कहा कि उनकी दृष्टि में राष्ट्र के सदस्यों में इस्पात सी दृढ़ता, संगठन में निष्ठा, चारित्रिक उज्ज्वलता, कठिन काम करने का साहस और उद्देश्य पूति के लिए स्वयं को झोंकने का मनोभाव कूट-कूट कर भरा होना चाहिए। प्रधानमंत्री की दृष्टि में राष्ट्र की महानता इन्हीं गुणों में छुपी हुई है। जो राष्ट्र इन गुणों से दूर हो जाता है वह कभी उन्नति को प्राप्त नहीं करता ।उसकी स्थिति दिन प्रतिदिन दयनीय होती चली जाती है।
अयोध्या में मोदी ने अपने संबोधन में कहा है, ‘राम विवाद नहीं, समाधान है’। प्रधानमंत्री मोदी के इस कथन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जो लोग श्रीराम को विवादों के घेरे में डालने का काम कर रहे थे और यह कहते नहीं थकते थे कि राम के नाम पर देश में हिंसा हो रही है या हिंसा भड़काई जा रही है, उन लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि राम समस्या का समाधान थे, वह विवाद नहीं थे। राम मंदिर उस समस्या का समाधान है जो हमारे देश के युवा वर्ग के सामने इतिहास बोध पर बड़े-बड़े प्रश्न चिह्न लगाकर खड़ी कर दी गई थी। राम मंदिर का निर्माण उस समस्या का भी समाधान है जिसमें इतिहास की गलत व्याख्या करते हुए हमारे वीर वीरांगनाओं को कमतर करके आंका गया और सारे भारतवासियों की उस संघर्ष गाथा को कूड़ेदान में फेंक दिया गया जो राम मंदिर के इर्द-गिर्द भारत के स्वाधीनता आंदोलन के रूप में मचलती रही। राम हमारे राष्ट्र का पर्यायवाची है। राम और राष्ट्र के बीच में दूरी नहीं है बल्कि इन दोनों का अन्योन्याश्रित भाव का संबंध है। हमें इसी भाव से इन दोनों का सम्मान करना चाहिए।
राम की मर्यादा, राम का जीवन चरित्, राम के उदात्त भाव, राम का राष्ट्र प्रेम, राम का परिवार प्रेम, इस राष्ट्र के मूल्य हैं । जब संपूर्ण राम हमारे राष्ट्र में अंतर्निहित हो जाएगा, जब संपूर्ण राम राष्ट्र के तारों की झंकार बनकर गूंजने लगेगा या कोई नया संगीत छेड़ देगा, तब समझो कि भारत में रामराज्य स्थापित हो चुका है। इस प्रकार राम नवचेतना का गीत है, नवोत्थान का संगीत है, नवाचार का राग है और सदाचार का भाव है। शासन स्तर से नवचेतना के इस गीत का, नवोत्थान के संगीत का, नवाचार के इस राग का और सदाचार के इस भाव का जितना प्रचार प्रसार किया जाएगा , उतना ही राष्ट्र का निर्माण करने में हमें सुविधा होगी । अतः यदि देश का प्रधानमंत्री या कोई भी राजनेता इस प्रकार के राम संगीत को सुनाने का कार्य करता है तो समझो कि वह राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने संकल्प को अभिव्यक्ति दे रहा है। उसे क्रियान्वित कर रहा है।
जब राम को केवल एक राजा मान लिया जाता है तो हम गलती कर रहे होते हैं। क्योंकि उन्हें राजा मानने से अतीत की एक ऐसी अभिव्यक्ति जन्म लेती है जो बीते हुए कल के बारे में संकेत करती है। कहती है कि जो कल था, वह आज नहीं हो सकता अर्थात राजा और उनका राज्य बीते हुए कल की बात हो चुकी है। जिसे अब स्थापित नहीं किया सकता । इसी प्रकार जब राम को हम भगवान मान लेते हैं तो तब भी हम एक ऐसे लोक की यात्रा कर रहे होते हैं जिसकी स्वर्णिम आभा या दिव्य अनुभूति को हम यथार्थ में कभी लागू होते देख नहीं सकते। फिर राम को क्या माना जाए? हमारा मानना है कि उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम ही माना जाए। मर्यादा पुरुषोत्तम के उनके स्वरूप की अनुभूति हमारे साथ सनातन रूप में अनुभव होती है। जो कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी । मर्यादा पुरुषोत्तम उनका चरित्र है। मर्यादा पुरुषोत्तम बनना सबके लिए लक्ष्यित भी हो सकता है।
जो शासक उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अपना आदर्श मानेगा, वही यम नियम का पालन करने वाला होगा। वह धर्म की मर्यादा का पालन करने वाला होगा। धर्म के मर्म को समझने वाला होगा। उसका लक्ष्य देश के सर्व समाज की सर्वांगीण उन्नति करना होगा। यही राम का आदर्श है। यही राम राज्य है।
इसी राम राज्य की स्थापना करना गांधी जी ने देश के लिए अनिवार्य माना था। पर वह रामराज्य राम मंदिर के निर्माण के बिना अधूरा था। जो देश या समाज अपने मर्यादा पुरुषोत्तम का मंदिर नहीं बन सकता, उससे यह कैसे अपेक्षा की जा सकती है कि वह रामराज्य स्थापित कर सकता है ? कांग्रेस के शासनकाल में हिंदू विरोध से राष्ट्र विरोध तक राजनीति इसीलिए पथभ्रष्ट होती चली गई कि वह अपना आदर्श स्थापित नहीं कर पाई। बिना केंद्र के हम परिधि की ओर बढ़ते चले गए।
अयोध्या धाम में राम मंदिर का निर्माण करके हमने अपने केंद्र का निर्माण किया है। हमने यह निश्चित किया है कि हमारी विचारधारा का प्रेरणा स्रोत या केंद्र बिंदु क्या होगा ? किसी भी सरकार को या किसी भी देश को अपना आदर्श या प्रेरणा स्रोत निश्चित करना ही होता है। माना कि लोकतंत्र में संविधान प्रेरणा का स्रोत होता है परंतु वह प्रेरणा का स्रोत भी तब तक शब्दों की कोरी कल्पना मात्र है जब तक उसके उन शब्दों को किसी मर्यादा पुरुषोत्तम जैसे दिव्य व्यक्तित्व की दिव्यता प्राप्त न हो जाए। भारत की यह अपेक्षा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम न केवल आज के प्रधानमंत्री के लिए आदर्श या प्रेरणा के स्रोत हों, अपितु भविष्य में आने वाले हर प्रधानमंत्री के भी प्रेरणा स्रोत हों।
उनका मंदिर किसी पाखंड या ढोंग की भेंट न चढ़ जाए , अपितु वह हमारे राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता का प्रेरणास्रोत बने।
यदि ऐसा हो सका तो फिर यह बात अधिक महत्वपूर्ण नहीं रहेगी कि प्रधानमंत्री किस जाति या संप्रदाय का है ? राम का होते ही उसकी जाति नगण्य हो जाएगी। उसका संप्रदाय नगण्य हो जाएगा। क्योंकि राम संप्रदाय निरपेक्षता की गारंटी हैं। राम जातिविहीन समाज की गारंटी हैं। राम सर्वांगीण समाज की उन्नति की गारंटी हैं । बस, यही राम राज्य है और यही भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है।

डॉ राकेश कुमार आर्य

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betnano
betnano
betnano
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpas giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
hitbet giriş