images (34)

डॉ. विवेक आर्य

वर्षा ऋतु का आगमन हो गया है। भीष्म गर्मी के पश्चात वर्षा का जल जब तपती धरती पर गिरता है। तो गर्मी से न केवल राहत मिलती है। अपितु चारों ओर जीवन में नवीनता एवं वृद्धि का समागम होता हैं। वेदों में वर्षा ऋतु से सम्बंधित अनेक सूक्त हैं। जैसे पर्जन्य सूक्त ( ऋग्वेद 7/101,102 सूक्त), वृष्टि सूक्त (अथर्ववेद 4/12) एवं प्राणसूक्त (अथर्ववेद 11/4 ) मंडूक सूक्त (ऋग्वेद 7/103 सूक्त)आदि। पर्जन्य सूक्त मेघ के गरजने, सुखदायक वर्षा होने एवं सृष्टि के फलने-फूलने का सन्देश देता हैं। जबकि मंडूक सूक्त वर्षा ऋतु में मनुष्यों के कर्तव्यों का प्रतिपादन करता हैं। इस लेख में हम मंडूक सूक्त के 10 मन्त्रों में बताये गए आध्यात्मिक, सामाजिक और शारीरिक लाभों पर प्रकाश डालेंगे। मंडूक शब्द को लेकर कुछ विदेशी विद्वानों ने परिहास किया हैं। (Brahma und die Brahmanen von Martin Haug,1871) उनका कहना था कि जब सूखा पड़ता है। तब कुछ ब्राह्मण तालाब के निकट एकत्र होकर मेंढक के समान टर्र टर्र कर वेदों के इस सूक्त को पढ़ते हैं। जबकि अनेक विदेशी लेखकों जैसे ब्लूमफील्ड और विंटरनित्ज़ ने इसके व्यवहार अनुकूल व्याख्या करते हैं।
विंटरनित्ज़ लिखते है-
“ग्रीष्म ऋतू में मेंढक ऐसे निष्क्रिय पड़े रहते हैं जैसे मौन का व्रत किये हुए ब्राह्मण। इसके अनन्तर वर्षा आती है मंडूक प्रसन्नतापूर्वक टर्र टर्र के साथ एक दूसरे का स्वागत करते हैं। जैसे कि पिता पुत्र का। एक मंडूक दूसरे मंडूक की ध्वनि को इस प्रकार दोहराता है, जैसे शिष्य वेदपाठी ब्राह्मण गुरु के मन्त्रों को। मंडूकों के स्वरों के आरोह व अवरोह अनेक प्रकार के होते हैं। जिस जिस सोमयाग में पुरोहित पूर्ण पात्र के साथ ओर बैठकर गाते हैं, ऐसे ही मंडूक अपने गीतों से वर्षा ऋतु के प्रारम्भ मनाते हैं। ”
(सन्दर्भ-प्राचीन भारतीय साहित्य का इतिहास, हिंदी संस्करण, पृष्ठ 80, (A History Of Indian Literature) विदेशी लेखक ऍम विंटरनिटज M Winternitz)
विदेशी लेखक मंडूक से केवल मेंढक का ग्रहण करते है। जबकि आर्य विद्वान् पंडित आर्य मुनि जी मंडूक से वेदानां मण्डयितार: अर्थात वेदों को मंडन करने वाले ग्रहण करते हैं। वर्षा ऋतु के साथ श्रावणी पर्व का आगमन होता है। इस पर्व में मनुष्यों को वेद का पाठ करने का विधान हैं। इस पर्व में वेदाध्ययन को वर्षा आरम्भ होने पर मौन पड़े मेंढक जैसे प्रसन्न होकर ध्वनि करते है। वेद कहते है कि हे वेदपाठी ब्राह्मण वर्षा आरम्भ होने पर वैसे ही अपना मौन व्रत तोड़कर वेदों का सम्भाषण आरम्भ करे। मंडूक सूक्त के प्रथम मन्त्र का सन्देश ईश्वर के महत्त्व गायन से वर्षा का स्वागत करने का सन्देश हैं।
इस सूक्त के अगले चार मन्त्रों में सन्देश दिया गया है कि गर्मी के मारे सुखें हुए मंडूक वर्षा होने पर तेज ध्वनि निकालते हुए एक दूसरे के समीप जैसे जाते हैं , वैसे ही हे मनुष्यों तुम भी अपने परिवार के सभी सदस्यों, सम्बन्धियों, मित्रों, अनुचरों आदि के साथ संग होकर वेदों का पाठ करों। जब सभी समान मन्त्रों से एक ही पाठ करेंगे तो सभी की ध्वनि एक से होगी। सभी के विचार एक से होंगे। सभी के आचरण भी श्रेष्ठ बनेंगे। गुरुकुल में विद्यार्थी गुरु के पीछे एक समान मन्त्रों को दोहराये। गृहस्थी पुरोहित के पीछे दोहराये। वानप्रस्थी और सन्यासी भी अपने वेदपाठ द्वारा समाज को दिशानिर्देश दे। इन मन्त्रों का सामाजिक सन्देश समाज का संगतिकरण करना हैं। यह सामाजिक सन्देश आज के समय में टूटते परिवारों के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। जहाँ पर संवादहीनता एवं स्वार्थ मनुष्यों में दूरियां उत्पन्न कर रहा हैं। वही संगतिकरण का वेदों का सन्देश अत्यंत व्यावहारिक एवं स्वीकार करने योग्य हैं। मंडूक सूक्त का छठा मंत्र वृहद् महत्व रखता है। इस मन्त्र में कहा गया है की मेंढ़कों में कोई गौ के समान ध्वनि करता है। कोई बकरे के समान करता है। कोई मेंढक चितकबरे रंगा का तो कोई हरे रंग का होता है। अनेक रूपों वाला होने के बाद भी सभी मेंढक का नाम एक ही है।
सभी मिलकर एक ही वेद वाणी बोलते है। सामाजिक अर्थ चिंतन करने योग्य है। समाज में कोई मनुष्य धनी हैं, तो कोई निर्धन है। सभी के वर्ण भी अलग अलग है। भिन्न भिन्न पृष्ठ्भूमि , भिन्न भिन्न योग्यता ,भिन्न भिन्न व्यवसाय , भिन्न भिन्न वर्ण होने के बाद भी सभी मनुष्य बिना किसी भेदभाव के एकसाथ मिलकर वेदों का पाठ करे। यह सामाजिक सन्देश जातिवाद के विरुद्ध वेदों का अनुपम सन्देश हैं। मंडूक सूक्त के अगले तीन मन्त्रों में मनुष्यों को ईश्वरीय वरदान वर्षा ऋतु का आरम्भ तप करते हुए सोमयाग आदि अग्निहोत्र करने का सन्देश देते हैं। यज्ञ में संगतिकरण के अतिरिक्त इन मन्त्रों के पाठ करते हुए बड़े बड़े होम किये जाये। यह होम एवं आचरण रूपी व्रत एक दिन, चातुर्मास अथवा वर्ष भर भी चल सकते हैं। वेद पाठ के आरम्भ को उपाकर्म कहा जाता है। और व्रत समाप्ति पर किये जाने वाले संस्कार को उपार्जन कहते है।
यह वैदिक संस्कार मनुष्य को व्रतों के पालन का सन्देश देते हैं। वर्षा ऋतु में अग्निहोत्र करने का विधान पर विशेष बल इसलिए भी दिया गया है क्यूंकि इस ऋतु में अनेक बीमारियां भी फैलती हैं। इनबीमारियों से बचाव में यज्ञ अत्यंत लाभकारी हैं। पंडित भवानी प्रसाद जी अपनी पुस्तक आर्य पर्व पद्यति में वर्षाकाल में हवन सामग्री में काला अगर, इंद्र जौ, धूपसरल, देवदारु, गूगल, जायफल, गोला, तेजपत्र, कपूर, बेल, जटामांसी, छोटी इलायची, गिलोय बच, तुलसी के बीज, छुहारे, नीम आदि के साथ गौ घृत से हवन करने का विधान लिखते हैं। यह वैदिक विज्ञान आदि काल से ऋषियों को ज्ञात था। इन जड़ी बूटियों के होम में प्रयोग से वे वर्षा ऋतु में फैलनी वाली बिमारियों से अपनी रक्षा करते थे। यह शारीरिक विज्ञान मंडूक सूक्त के सन्देश में समाहित हैं। इस सूक्त का अंतिम मन्त्र एक प्रकार से फलश्रुति है। इस मन्त्र में वेदों के व्रत का पालन करने वाले के लाभ जैसे अनंत शिक्षा का लाभ, ऐश्वर्या और आयु वृद्धि की प्राप्ति का हृदय में प्रभाव, परमात्मा की उपासना का सन्देश आदि बताया गया हैं। वेदव्रती ब्राह्मणों अर्थात मंडूकों से हमें सैकड़ों गौ की प्राप्ति हो अर्थात हमारा कल्याण हो।
तुलसीदास रामायण में एक चौपाई मंडूक सूक्त से सम्बन्ध में आती है।
दादुर धुनि चहु दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई॥
नव पल्लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिलें बिबेका॥
-किष्किन्धा काण्ड
अर्थात वर्षा का वर्णन में श्रीराम जी लक्ष्मण को कहते हैं- वर्षा में मेंढको की ध्वनी इस तरह सुनाई देती है जैसे बटुकसमुदाय ( ब्रह्मचारीगण) वेद पढ़ रहे हों। पेड़ों पर नए पत्ते निकल आये है। एक साधक योगी के मन को यह विवेक देने वाला हैं।
आईये मंडूक सूक्त से वेदव्रती होने का व्रत वर्षाऋतु में ले और संसार का कल्याण करें।
सन्दर्भ ग्रन्थ-
ऋग्वेद भाष्य पंडित आर्यमुनि जी
ऋग्वेद भाष्य पंडित श्री पाद दामोदर सातवलेकर
ऋग्वेद भाष्य- पंडित हरिशरण सिद्धान्तालंकार
आर्यपर्व पद्यति- पंडित भवानीप्रसाद
वैदिक विनय- आचार्य अभयदेव
प्राचीन भारतीय साहित्य का इतिहास- ऍम विंटरनिटज
रामचरितमानस -तुलसीदास

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
betpark giriş
hitbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
hitbet
interbahis giriş
hitbet giriş
betgaranti giriş
grandpashabet
jojobet
betgaranti giriş
jojobet