*राष्ट्र विरोधी है जहांगीरपुरी का मुस्लिम हथकंडा*

images (16)

*राष्ट्र-चिंतन*

*मार भी खाया हिंदू और अब दंगाई भी घोषित हुआ हिंदू*

*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*
==================

दिल्ली की जहांगीरपुरी में अवैध अतिक्रमण हटाने पर फिलहाल रोक जरूर लग गयी है, सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला क्या होगा, इस पर संशय है। लेकिन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों ने जिस प्रकार से जहांगीरपुरी को अपना राजनीतिक स्वार्थ का और मुस्लिम उत्पीड़न का हथकंडा बना दिया , उसके दूरगामी निष्कर्ष और दुष्परिणाम बह ुत ही खतरनाक और जहरीले निकलेंगे। कोई एक-दो दल नहीं बल्कि मुसलमानों के पक्ष में राजनीति करने वाला कौन दल मुस्लिम प्रेम में पागल नहीं हैं? कांग्रेस जहांगीरपुरी में सक्रिय है, आम आदमी पार्टी सक्रिय है, कम्युनिस्ट पार्टियां सक्रिय है, समाजवादी पार्टी सक्रिय है, राजद सक्रिय है, इन सभी के साथ ही साथ ममता बनर्जी भी कहां पीछे रहने वाली थी। ममता बनर्जी की पार्टी भी सक्रिय हो गयी है। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक पार्टियों के लिए जहांगीरपुरी एक तीर्थ के सम्मान बन गयी है जहां पर मुसलमानों के पक्ष में हर तरह की बातें हो रही हैं, जिससे हिन्दुओं के मन में घृणा और अविश्वास का वातावरण तेजी के साथ विकसित हो रहा है। जहांगीरपुरी में हिंदुओ की मुसलमानों द्वारा पिटाई भी हुई और अब उल्टे हिंदुओ को दंगाई कह कर अपमानित भी किया जा रहा है।
प्रश्न यह भी उठ रहा है कि क्या मजहब के नाम पर अपराध और घृणा फैलाने की अनुमति मिलनी चाहिए, क्या आपको सड़क की जमीनें कब्जा कर बैठने का मजहबी जन्मसिद्ध अधिकार मिल गया है? अगर इस तरह की प्रवृति को इसी प्रकार से छूट मिलती रही और खाद-पानी मिलता रहा तो फिर देश के रमणीक और महत्वपूर्ण जगहों पर सिर्फ और सिर्फ मजहबी आधार वाले और हिंसक लोगों का ही कब्जा मिलेगा। कल दिल्ली के इंडिया गेट, रामलीला मैदान, लालकिले जैसे सभी सार्वजनिक स्थानों पर मजहबी और विदेशी लोगों का कब्जा मिलेगा। फिर देश की राजधानी झुग्गियों और हिंसकों के शहर के रूप में तब्दील हो जायेगी? पर इसकी चिंता किसकों है। हर सभी को मुस्लिम वोट बैंक की ही चिंता सता रही है।
जहांगीरपुरी में यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? एमसीडी को अतिकम्रण हटाने के लिए विवश क्यों होना पड़ा? क्या यह सिर्फ मुस्लिम विरोधी कार्रवाई है? क्या जहांगीरपुरी में सिर्फ मुस्लिम आबादी ही रहती है? जहांगीरपुरी में क्या विदेशी हिंसक नागरिकों का कब्जा है? क्या बांग्लादेशी और रोहिंग्या जैसे घुसपैठिये अवैध रूप से कब्जा जमाये बैठे हैं? अगर नही ंतो फिर मुस्लिम आबादी के उत्पीड़न का शोर क्यों उठाया जा रहा है? इसके पीछे की साजिश और राजनीति का अर्थ क्या है? अतिक्रमण हटाने वाले अधिकारियों न कह दिया था कि चाहे मस्जिद हो या मंदिर, अतिक्रमण है तो फिर अतिक्रमण साफ होगा।
प्रमाण पर प्रमाण है। जहांगीरपुरी अपराध और मजहबी घृणा का पर्याय बन गयी है। क्या यह सही नहीं है कि जहांगीरपुरी में हिन्दुओं के साथ दोयम नागरिक का व्यवहार होता है, हिन्दुओं को हिंसा और भय दिखाकर रखा जाता है। सच तो यह है कि जहांगीरपुरी में हिन्दू सिर उठा कर भी नहीं चल सकते हैं? हिन्दुओं को अपने पर्व-त्यौहारों को मनाने का भी अधिकार नहीं है। अगर हिन्दू अपने पर्व-त्यौहारों पर पथ संचलन का आयोजन करे तो फिर कट्टरपंथी मुसलमानों को यह स्वीकार नहीं है। इसका प्रमाण हनुमान जयंती के अवसर पर पथ संचलन पर हिंसक हमला है। पथ संचलन पर मुसलमानों के समूहों ने कैसी हिंसक प्रवृति अपनायी थी, यह भी जगजाहिर है। मुसलमानों के हमले बहुत ही खतरनाक थे। मुसलमानों ने किन-किन हथियारों का प्रयोग किया, यह भी उल्लेखनीय है। मुसलमानों ने तलवारों से हमले किये, गोलियां चलायी। सबसे बड़ी बात यह है कि मुसलमानों के घरों से पत्थरों की बरसात हुई थी। मुस्लिम औरतों ने पत्थरों से हमले की थी। मुसलमानों के घरों से पत्थरबाजी का अर्थ कौन नहीं जानता है। सीएए के खिलाफ दिल्ली के दंगों में मुसलमानों के घरों से भी इसी तरह की पत्थरबाजी हुई थी। सबसे बड़ी बात यह है कि मुसलमानों के हमले से कोई एक-दो नहीं बल्कि आठ-आठ पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके साथ ही साथ कई हिन्दू भी घायल हुए थे। जहांगीरपुरी की वह घटना कोई दंगा नहीं था। दंगा तो दो तरफा होता है। यह एक तरफा था और हिन्दुओं पर सरेआम हमला था।
पुलिस और नागरिक प्रशासन का जहांगीरपुरी हिंसक प्रवृृति पर निष्कर्ष बहुत ही सटीक था। पुलिस और नागरिक प्रशासन की साफ समझ थी कि जहांगीरपुरी जैसे क्षेत्रों में कानून व्यवस्था की समस्या अब नियंत्रण से बाहर है, कानून के शासन का कोई अर्थ नहीं है। अपराध और काले धंधों पर रोक लगाना मुश्किल है। कहने का अर्थ यह है कि जहांगीरपुरी जैसे क्षेत्र जंगल राज के तौर पर कानून का मुंह चिढ़ाते हैं। ऐसी स्थिति में कोई न कोई सख्त कदम उठाने की जरूरत थी। पुलिस और नागरिक प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया। जहांगीरपुरी में सरकारी जमीनों का अतिक्रमण हुआ है, सरकारी जमींनों का अतिम्रमण कर अवैध घरों का निर्माण हुआ है। यहां तक की सड़कों का भी अतिक्रमण हुआ है। जहांगीरपुरी में सड़कों पर सरेआम अवैध काम और अपराधकर्म देखे जा सकते हैं। अगर पुलिस और नागरिक प्रशासन सड़कों पर से अतिक्रमण हटा रही है तो कौन सा गुनाह कर रही है? सबसे बड़ी बात यह है कि जहांगीरपुरी में सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि हिन्दू भी अतिक्रमण हटाओं अभियान के शिकार होते। अगर कोई हिन्दू अतिकम्रण कर बैठा होगा तो फिर उस पर भी बुलडोजर चलता।
सिर्फ जहांगीरपुरी का ही प्रश्न नहीं है। दिल्ली में ऐसे दर्जनों जगहें जहां पर जंगल राज कायम है। वोट बैंक की राजनीति के कारण कांग्रेस ने विदेशियों को बसाया है। दिल्ली में एक तरह से बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों का पौबारह है। ये बांग्लादेशी और रोहिंग्या अपराध और अन्य काले कामों में लिप्त है। जिन-जिन इलाको में मुसलमानों का आबादी थोड़ी सी भी बढ़ी उन-उन इलाकों में हिन्दुओं के उपर हिंसा की बरसात हुई। हिंसा के बल पर हिन्दुओं को खदेड़ने का हिंसक जेहाद जारी है। उत्तर प्रदेश में एक कैराना गंभीर प्रश्न खड़ा किया था। दिल्ली में कैराना जैसी स्थिति कोई एक जगह नहीं है बल्कि दर्जनों जगहों पर है। दिल्ली की दर्जनों जगहों पर हिन्दुओं के घर विकाउ है का बोर्ड मिल जायेगा। डॉक्टर नारंग की हत्या भी बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों ने कर दी थी। डॉक्टर नारंग की हत्या के समय भी यह प्रश्न गंभीरता के साथ उठा था।
हिन्दुओं के उपर दिल्ली में किस प्रकार भेदभाव और उत्पीड़न हुए हैं, इसका उदाहरण भी देख लीजिये। अतिक्रमण के नाम पर हिन्दुओ के दर्जनों मंदिरों को प्रशासन और कोर्ट ने तोडवा डाले। पर सड़कों और पार्को को कब्जा कर बनायी गयी एक मस्जिद या एक मजार तक नहीं तोड़ी गयी। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद, त्रीनमूल कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियों ने हिन्दुओं के मंदिरों को तोड़ने पर कभी हिन्दू उत्पीड़न का प्रश्न नहीं खड़ा किया। अगर दिल्ली में अवैध मंदिरें तोडे जा सकते हैं तो फिर अवैध मस्जिदें और अवैध मजारें क्यों नहीं तोड़ी जा सकती हैं?
जहांगीरपुरी में हिंसक मुस्लिमों के पक्ष में तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों की गोलबंदी से सबसे अधिक खुश भाजपा और नरेन्द्र मोदी होंगे। हिन्दू मन आज भड़का हुआ है। दिल्ली में वैसे कम्युनिस्ट, वैसे कांग्रेसी और वैसे समाजवादी भी भड़के हुए जिन्होंने जहांगीरपुरी की मुस्लिम गंुंडागर्दी को देखा है। इसके अलावा भाजपा से नाराज हिन्दूओं की गोलबंदी अब भाजपा के पक्ष में हो रही है। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां अपनी करतूतों से हिन्दुओं के मन में आशंका और विद्रोह पैदा कर दी है। हिन्दुओं के मन में यह बात बैठ रही है कि भाजपा चाहे जैसी है पर वह हिन्दुओं के साथ खड़ी तो है। यह सही है कि भाजपा ही एक मात्र पार्टी है जो हिन्दुओं के साथ खड़ी रहती है। जब भाजपा छोड़कर सभी दल हिन्दू विरोधी होंगे तब हिन्दुओं की पंसद भाजपा ही होगी। हिन्दू आज सत्ता बनाते भी हैं और सत्ता का सर्वनाश भी करते हैं। इसलिए हिन्दुओं के हितों पर कुठाराघात का दुष्परिणाम भी झेलना होगा।

*संपर्क…*
*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*
*मोबाइल नंबर ..* 9315206123

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
hititbet
hititbet
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
hititbet
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
grandpashabet
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş