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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

खालिस्तानी आंदोलन, कश्मीर का आतंकवाद और आईएसआई को समर्थन देती कांग्रेस

 

राष्ट्रवादी लोगों के लिए यह एक बहुत ही शुभ समाचार है कि जबसे केंद्र में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली है ,तब से देशविरोधी शक्तियों को पसीना आ रहा है। किसी न किसी बहाने ये देश विरोधी शक्तियां एक मंच पर आने का प्रयास करती हैं। देश की एकता और अखंडता के प्रति समर्पित किसी भी सरकार के रहते देश विरोधी शक्तियों की यह स्थिति होनी भी चाहिए। परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि देशवासी हाथ पर हाथ धरकर बैठे रह जाएं जितनी तेजी से देश विरोधी शक्तियों का सत्ता से सफाया हुआ उतनी ही तेजी से वह लौटने का प्रयास कर रही हैं । यदि राष्ट्रवादी देशवासी अपनी एकता का परिचय देने में तनिक भी शिथिलता का प्रदर्शन करते पाए गए तो फिर सत्ता उन्हीं हाथों में चली जाएगी जो देश की एकता और अखंडता को तार-तार करने वाले समूहों या आतंकी संगठनों का समर्थन करते रहे हैं या हिंदू विरोध की राजनीति करते – करते देशविरोध की सीमा तक पहुंच गए हैं ।
जिन लोगों के हाथों में पिछले 70 वर्ष से सत्ता की बागडोर रही वह सत्ता के लिए कुलबुला रहे हैं । जबकि उनके राज में जो लोग मौज करते रहे और देश तोड़ने की कीमत पर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे वे अब अपने ‘अच्छे दिनों’ की याद में तड़प रहे हैं । कहा जाता है कि ‘चोर चोर मौसेरे भाई’ – इसलिए प्रत्येक ऐसे निर्णय पर जिससे भारतीय राष्ट्रवाद को बल मिलता हो या राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूती मिलती हो, ये लोग नरेंद्र मोदी सरकार के विरुद्ध आंदोलनरत हो जाते हैं। सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस ने अपनी पिछली गलतियों से कोई शिक्षा नहीं ली है और जिस प्रकार यह आजादी से पूर्व देशभक्त क्रांतिकारी लोगों का विरोध करती थी अपनी उसी नीति पर यह आज भी चल रही है । देश की एकता और अखंडता के प्रति समर्पित होकर काम करने वाली शक्तियों को कांग्रेस ने न तो आजादी से पहले समर्थन दिया और न ही आज दे रही है। यही कारण रहा कि आजादी से पूर्व कॉन्ग्रेस क्रांतिकारी बिस्मिल, शहीदे आजम भगतसिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आर्य समाज के महान नेता स्वामी श्रद्धानंद और वीर सावरकर जैसे देशभक्तों का विरोध करती रही। अपनी इसी सोच के चलते कांग्रेस ने अब मोदी सरकार के धारा 370 को हटाने के निर्णय का तो विरोध किया ही है सीएए और एनआरसी का विरोध करते हुए अब यह किसानों को भी अपना समर्थन देकर देश में आतंकवाद को लौटाने की गतिविधियों में सम्मिलित हो रही है। किसानों को अपनी मांगों को मनवाने के लिए सरकार का विरोध करने का पूरा संविधानिक अधिकार है । परंतु इस संवैधानिक अधिकार के सहारे यदि खालिस्तानी आतंकवादी और जम्मू कश्मीर की स्वतंत्रता की मांग करने वाले आतंकी संगठन एक होते दिखाई दे रहे हैं और कांग्रेस उन सबका समर्थन कर रही है तो निश्चय ही इस खतरे की घंटी को देश के लिए स्वयं कांग्रेस बजा रही है।
कांग्रेस का इतिहास भी ऐसा ही रहा है। यह पहले समस्याएं खड़ी करती है और फिर जब उस समस्या की भेंट कोई इसका नेता चढ जाता है तो देश के लोगों को ऐसा कह कर भ्रमित करती है कि हमने देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान दिये हैं । भिंडरांवाले को आतंकवादी बनाने में कांग्रेस ने ही अपनी गलत भूमिका का निर्वाह किया था और जब पंजाब आतंकवाद की लपटों में झुलसने लगा तो कांग्रेस की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वहां पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेना भेजकर ऑपरेशन ब्लूस्टार करना पड़ा। जिसकी भेंट स्वयं इंदिरा गांधी ही चढ़ीं। जिसे कांग्रेस आज तक यह कहकर भुनाती है कि उसने देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान किए हैं।
कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि अब देश की जनता बहुत अधिक जागरूक हो चुकी है । वह प्रत्येक राजनीतिक दल की और उसके नेताओं की भूमिका पर बड़ी बारीकी से नजर रखती है । आज देश के लोग भली प्रकार यह समझ रहे हैं कि राहुल गांधी अपने पूर्वजों के पदचिन्हों पर चलते हुए किस प्रकार आतंकवादी और देशविरोधी शक्तियों का साथ देकर देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं ?
कांग्रेस और देश के कई राजनीतिक दलों की ऐसी ही मूर्खता के चलते दिल्ली के शकरपुर इलाके से स्पेशल सेल ने 5 लोगों की गिरफ्तारी की है। पूछताछ में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब खालिस्तानी आंदोलन और कश्मीर के आतंकवाद को जोड़ने की तैयारी में है। यदि तथाकथित किसान आंदोलन अपने इस गुप्त एजेंडे को लागू कराने में सफल होता है और पंजाब व कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने में सफल होता है तो इसके लिए कांग्रेस और उसके समर्थक राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं पाएंगे। इतिहास उनके इस राष्ट्रविरोधी कुकृत्य का दंड उन्हें अवश्य देगा।
कांग्रेस और उसके समर्थक राजनीतिक दलों को यह बात बहुत गंभीरता से लेनी चाहिए कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को 5 हार्डकोर अपराधी जिस प्रकार मिले हैं और उनके पास से बड़ी मात्रा में ड्रग्स और हथियारों की बरामदगी हुई है ,उसका प्रयोग वह देश की एकता और अखंडता को तार-तार करने में करने जा रहे हैं और उसी आंदोलन को अपना हथियार बनाने जा रहे हैं जिसका समर्थन कांग्रेस व उसके राजनीतिक साथी कर रहे हैं । निश्चय ही ऐसी परिस्थितियों में अब राहुल गांधी और उनके राजनीतिक साथियों को यह बात स्पष्ट करनी चाहिए कि वह इस प्रकार की गतिविधियों मैं संलिप्त लोगों के बारे में अपने क्या विचार रखते हैं ? यह तब और भी अधिक आवश्यक हो जाता है जब पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि पाकिस्तान की आईएसआई उन लोगों के माध्यम से खालिस्तान आंदोलन को कश्मीर के आतंकवाद से जोड़ने की तैयारी में है। माना कि किसी भी प्रकार की अराजकता को नष्ट करने की जिम्मेदारी देश की सरकार पर होती है ,परंतु लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि विपक्ष विपक्ष होते हुए भी सरकार का एक अंग होता है । क्योंकि वह जनता की इस भावना के आधार पर जनप्रतिनिधि के रूप में देश के विधान मंडलों में बैठा होता है कि वह देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने की सरकार की


इच्छाशक्ति का समर्थन करेगा और यदि सरकार अपने इस कर्तव्य में कहीं लापरवाही बरतती दिखाई देगी तो उसे सही रास्ते पर भी लाएगा। विपक्ष को सरकार के कार्यों की आलोचना करने का अधिकार देकर भी जनता उसे विधानमंडलों में इसलिए नहीं बैठाती है कि वह देश की एकता और अखंडता को तार-तार करने वाले आतंकी संगठनों का समर्थन करता हुआ पाया जाएगा। हमें देशद्रोही गतिविधियों का समर्थन करने वाले विपक्ष की आवश्यकता नहीं है ,बल्कि सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने वाले और सरकार का उचित मार्गदर्शन करने वाले विपक्ष की आवश्यकता है। यदि राहुल गांधी के नेतृत्व में आज का विपक्ष मतिभ्रष्ट होकर आतंकी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में संलिप्त होता जा रहा है तो यह देश के लिए बहुत ही भारी अपशकुन है। समझ नहीं आता है कि सुभाष चंद्र बोस को तोजो का कुत्ता कहने वाले और 1962 के युद्ध में भारत के प्रधानमंत्री नेहरू को अपना प्रधानमंत्री न मानकर माओ को अपना राष्ट्रपति मानने वाले कम्युनिस्टों के साथ कांग्रेस कैसे सामंजस्य बैठा रही है ? विशेष रूप से तब जबकि कम्युनिस्ट आज भी भारत के विषय में ऐसी ही सोच रखते हैं। ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ और ‘अवार्ड वापसी गैंग’ भी देश की एकता और अखंडता के विरुद्ध कार्य करने वाले लोगों का समर्थन कर रहे हैं। जिन्हें कांग्रेस अपना समर्थन देकर देश विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का विरोध करते करते देश का विरोध करने की सीमा तक कांग्रेस बढ़ चुकी है। ……. हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?
कांग्रेस ने वंदेमातरम को न गाकर ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा’ – को गाने पर बल दिया है। उसे वंदे मातरम में सांप्रदायिकता की गन्ध आती है। जबकि ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा’ – को गाने में वह राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत होता हुआ देखती है। व्यावहारिक सत्य यही है कि जो लोग वंदेमातरम की बात करते हैं देश की एकता और अखंडता के लिए पूर्णतया समर्पण उन्हीं के दिलों में है। इसके विपरीत जो लोग तुष्टीकरण की नीति के चलते सत्य से आंखें मूंदकर अंधेरे में आंखें खोलने का नाटक करते हैं वह ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान’- बना नहीं पाए , बल्कि अपनी काली गतिविधियों से देश के गुलिस्ता को बर्बाद करने की हरचंद कोशिश करते हुए दिखाई देते हैं।
कांग्रेस इस समय सब शवोच्छेदन कक्ष में पड़ी हुई है। जहां उसके चारों ओर उसके देशविरोधी कुकृत्यों की दुर्गंध ने डेरा डाल दिया है। लगता है यह दुर्गंध अब उसको रास आ गई है। तभी तो वह दुर्गंध को भी दुर्गंध न समझ कर सुगंध समझ रही है। पर अब कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि वह चाहे दुर्गंध को सुगंध समझ ले , पर देश की जनता का राजनीतिक विवेक पूर्णतया अपने ठिकाने पर है, और वह दुर्गंध को दुर्गंध व सुगंध को सुगंध जान कर ही अपना निर्णय लेती जा रही है । तभी तो उसने हैदराबाद और उससे पहले बिहार में कांग्रेस को उसकी सही औकात बता दी है। यदि कांग्रेस अभी भी नहीं सुधरी तो आने वाले चुनावों में भी उसका यही हाल होगा।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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