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भयानक राजनीतिक षडयंत्र विशेष संपादकीय

आखिर भारत के शत्रुओं से क्यों मिलते हैं आमिर खान ?

आजकल देश में आमिर खान एक्टर की टर्की की प्रथम महिला मोहतरमा एर्डोगन से इस्तांबुल में उनके महल में हुई भेंट को लेकर भारतवासियों में खास चर्चा एवं भारी क्षोभ है।
वास्तव में भारत वासियों में ऐसा क्षोभ होना स्वाभाविक है , क्योंकि भारत के करोड़ों लोगों ने आमिर खान की बनाई गई फिल्मों को देखकर आमिर खान को प्यार ही नहीं दिया बल्कि उसको रईस भी बनाया। बदले में आमिर खान ने भारत को क्या दिया? यह विचार करने का विषय है।

इस पर विचार करने से पूर्व हम थोड़ा सा टर्की देश के विषय में बात करेंगे। यूरेशिया में काला सागर के वह जॉर्जिया देश के दक्षिण में टर्की एक मुस्लिम देश है इसके दक्षिण में सीरिया है , दक्षिण पूर्व में इराक तथा इनके भी दक्षिण में सऊदी अरब है। यह टर्की की भौगोलिक स्थिति है।
सऊदी अरब एवम् टर्की मुस्लिम जगत में एक दूसरे के धुर विरोधी एवं प्रतिद्वंदी हैं। दोनों में मुस्लिम जगत का मुखिया बनने की होड़ है।सऊदी अरब की छवि कट्टरपंथ की नहीं है। वह एक मध्य मार्ग पर चलने वाला देश है। सऊदी अरब में भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी के आग्रह पर सऊदी में मंदिर बनवाया। इससे सऊदी अरब की धर्मनिरपेक्षता की छवि को बल मिलता है।
दूसरी तरफ टर्की एक कट्टरपंथी देश है।सऊदी अरब कश्मीर नीति पर भारत की सरकार का समर्थन करता है तो तुर्की भारत की कश्मीर नीति का विरोध करता है। इस प्रकार दोनों की विचारधारा एवं मानसिकता में बहुत ही मौलिक अंतर है। अपनी कट्टरपंथी विचारधारा के कारण ही टर्की ने सीरिया के उत्तरी पूर्वी भाग में सैनिक कार्रवाई की थी। भारत व विश्व के अनेक देशों ने इस कार्यवाही का विरोध किया था ,क्योंकि इससे वैश्विक शांति ,अमन और भाईचारा, क्षेत्रीय स्थिरता को आंच आ ती है तथा आतंकवाद के विरुद्ध जारी वैश्विक संघर्ष का महत्व कम होता है।
भारतवर्ष में बहुत ही महत्वपूर्ण एक घटनाक्रम होता है।
दिनांक 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने कश्मीर को पिछले 70 सालों से मिले हुए विशेष दर्जे को समाप्त कर उसका दो भागों में विभाजन किया और धारा 370 और 35a को हटा दिया गया। इन्हीं दो धाराओं के कारण कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था।
टर्की ने भारत के इस कार्यवाही का जबरदस्त विरोध किया। वैसे भी टर्की भारत के विरुद्ध फंडिंग करने में अग्रणी देश है। पाकिस्तान के बाद तुर्की का नंबर आता है।
यहां यह उल्लेख करना भी प्रासंगिक हो जाता है कि टर्की, पाकिस्तान, चाइना और मलेशिया यह चारों देश भारत में आतंकवाद को समर्थन देते हैं। कॉमन फंडिंग करते हैं। टर्की ने सितंबर 2019 में कश्मीर का मुद्दा यूएन में उठाया था। इसलिए वह कोई भी अवसर भारत से दुश्मनी का छोड़ना नहीं चाहता।
टर्की के अपने पड़ोसी देश साइप्रस ,आर्मेनिया और ग्रीस के साथ रिश्ते शत्रुता के हैं। इन देशों के साथ भी टर्की का व्यवहार अच्छा नहीं होता। दिनांक 7 अगस्त 2020 को टर्की ने दिनांक 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार द्वारा कश्मीर संबंधी निर्णय को अनुचित बताते हुए वक्तव्य जारी किया और दिनांक 5 अगस्त 2019 के कश्मीर संबंधी निर्णय को वापस लेने की मांग की।
टर्की ने यहां तक कहा कि भारत सरकार के इस निर्णय से जम्मू कश्मीर में समस्या और बढ़ेगी और शांति बहाल नहीं होगी।इसको हम परोक्ष रूप से एक धमकी के रूप में भी मान सकते हैं।
और यही नीति पाकिस्तान की है भारत के प्रति। इससे यह परिलक्षित होता है कि पाकिस्तान सरकार और टर्की की भारत के प्रति नीति एक समान हैं और टर्की का यह स्टैंड पाकिस्तान के सहयोग और समर्थन में है। यह तथ्य इस घटना से भी सिद्ध हो जाता है जब फरवरी 2020 में पाक की असेंबली में तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन द्वारा भाषण देते हुए कश्मीर की लड़ाई को प्रथम विश्व युद्ध से जोड़कर देखा।
टर्की भारत के मुसलमानों को आतंकवादी बनाने में पाक के बाद दूसरा देश है।
टर्की अपने यहां कश्मीर के मुसलमान युवकों को पढ़ने के लिए बुलाता है और उनको मोटी रकम वजीफा के नाम पर देता है। फिर उनको आतंकवाद में धकेल देता है। टर्की यूथ फाउंडेशन का सर्वे सर्वा वहां के राष्ट्रपति एरडोगन का बेटा बिलाल है। टर्की एब्रॉड एंड रिलेटेड कम्युनिटीज, तुर्किश एयरलाइंस, युनूस एमरे इंस्टिट्यूट, टर्की दियानत फाउंडेशन, तुर्की कॉपरेशन एंड कोऑर्डिनेशन एजेंसी नामक सभी संगठन टर्की की सरकार द्वारा पोषित, पल्लवित एवं संरक्षित हैं। और इसमें तुर्की के प्रेसिडेंट एरडोगन के फैमिली मेंबर्स जुड़े हुए हैं।
राष्ट्रपति अर्दोगन का बेटा बिलाल भारत के जमाते इस्लामिक संगठन ( छात्र गुट) वह स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है और इन सबका उद्देश्य भारत के विरुद्ध संगठित अपराध करना है। यह टर्की की भारत के प्रति नीतियां एवं विचारधारा है।
टर्की में तानाशाही चल रही है वहां आमिर खान को डर नहीं लगता। 5 वर्ष पहले रामनाथ गोयंका पुरस्कार लेने के लिए जब आमिर खान को टर्की बुलाया गया था ,वहां पर आमिर खान ने भारत के असहनशील होने की बात कही थी ,तथा हॉल में उपस्थित किसी भी व्यक्ति ने इस वक्तव्य का विरोध नहीं किया था, बल्कि अधिकतर लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन दिया था।
उसी हॉल में उसी समय सुधीर चौधरी एंकर भी उपस्थित थे। उनको भी वह पुरस्कार मिला था। उन्होंने आमिर खान से यह प्रश्न अवश्य किया था कि आपका भारतवर्ष के प्रति यह डबल स्टैंड क्यों है ?
उसी समय सुधीर चौधरी ने आमिर खान से पूछा था कि उत्तर प्रदेश के दादरी में जब अखलाक की हत्या की गई थी तो लोग अवार्ड वापस कर रहे थे, दूसरी तरफ सीमा पर हमारे सैनिकों को आतंकवादी शहीद कर रहे थे ।हमारे जवान शहीद हो रहे थे ।आतंकवादी शक्तियों की आलोचना आमिर खान ने क्यों नहीं की ?दादरी की घटना को लेकर भारत को सहनशील हीन क्यों बना दिया ?
यद्यपि इस प्रश्न पर आमिर खान ने किसी प्रकार की हिंसा को नाजायज बताया था। परंतु उनके द्वारा पुन:तुर्की जाना और वहां अपनी फिल्म लालसिंह चड्ढा के रीमेक की तैयारी करना, वहां की प्रथम महिला से मुलाकात करना यह सब आभास देता है कि आमिर खान को भारत के 130 करोड़ लोगों की भावनाओं की परवाह नहीं है बल्कि वह भारत के दुश्मन से मित्रता करता है।
वह टर्की में जाकर गजनी क्यों बन जाते हैं ? टर्की के कट्टरपंथी मुसलमान आमिर खान को सहिष्णु कैसे लगते हैं,? जिस टर्की ने ईसाई भवन को तोड़कर मस्जिद बना दी उसके विषय में भी आमिर खान कुछ आलोचना के शब्द बोल देते तो अच्छा रहता ।
यह ऐसे कुछ प्रश्न है जिनका भारत की जनता व जनमानस आमिर खान से स्पष्टीकरण चाहता है। भारत की जनता को उनसे प्रश्न पूछने का अधिकार है। क्योंकि भारत की जनता ने आमिर खान को प्यार दिया है। फिल्में देखकर उसको एक सफल एक्टर बनाया है।
5 वर्ष पहले आमिर खान की हिंदू पत्नी किरण यह कहती है कि भारत अब रहने के योग्य नहीं रह गया।
यह वक्तव्य भी गलत है , क्योंकि भारत के लोग तो बहुत सहिष्णु हैं। भारत ने सहिष्णु होने के कारण ही सन 1398 में ईरान, 26 मई 1739, (कुछ विद्वानों के अनुसार सन 1761 तो कुछ के अनुसार सन 18 76) मेंअफगानिस्तान, 1904 में नेपाल , 1911 में श्रीलंका, 1937 में( बर्मा) म्यांमार,1947 में पाक और बांग्लादेश बने । अव शेष पर निशाना है, जो अग्रिम लक्ष्य है।
विगत दिनों बेंगलुरु में हुई कांग्रेस के दलित विधायक के घर पर मुस्लिम भीड़ द्वारा आगजनी ,तोड़फोड़, मारपीट क्या कहती है ?
इस पर किसी ने अवार्ड वापस क्यों नहीं किए?
कांग्रेस के उस दलित विधायक के भतीजे नवीन का सिर कलम करने के लिए 51 लाख का इनाम बोलने वाले लोग किस संप्रदाय और किस जाति के हैं ? किसी ने आलोचना नहीं की।क्यों ?
क्या आपसी भाईचारा इस घटना से कमजोर नहीं हो रहा है ? जिस प्रकार की गतिविधियों में आमिर खान जैसे लोग सम्मिलित होते हैं , उनसे स्पष्ट होता है कि उनका ‘भाई’ कोई और है और ‘चारा’ केवल हिंदू हैं । अब सारे तथाकथित बुद्धिजीवी चुप क्यों है ?
दिल्ली दिल्ली दंगों में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार कौन हैं ?
अमित शर्मा को 400 चाकू मारना आखिर किस मानसिकता का परिचायक है ? भारत ने सदैव से सहनशीलता का परिचय दिया है। भारत ने सदैव से सभी वर्गों को ,संप्रदायों को, धर्म को, जातियों को समान अवसर प्रदान किए हैं। इसलिए सभी भारत वासियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह विरोधी शक्तियों से दूरी बनाकर रखें और भारत के हित साधन की बात करें। भारत के हित साधन में ही उनका हित है।

देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट चेयरमैन उगता भारत समाचार पत्र

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