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आओ कुछ जाने पर्व – त्यौहार

हम कब राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त मनाना सीखेंगे ?

*15 अगस्त पर झंडा क्यों फहराते हो भाई*?
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सबसे पहले आप सभी साथियों को 74 वे स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं| स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है |आज राष्ट्रीय अवकाश है सभी सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं, पब्लिक व निजी शिक्षण संस्थाओं में यह राष्ट्रीय पर्व मनाया जाता है वैश्विक कोरोना महामारी से राष्ट्रीय पर्व पर होने वाले तमाम आयोजन प्रतीकात्मक तौर पर ही किए गए हैं उत्साह उमंग नदारद है | कुछ रोचक सी जानकारी है जो आपके साथ साझा करना चाहूंगा.. कुछ के लिए यह जानकारी होगी तो कुछ के लिए भूल सुधार का मौका होगा आत्म अवलोकन विवेचन का | जब देश आजाद हुआ उस ऐतिहासिक तिथि अर्थात 15 अगस्त 1947 को तिरंगे झंडे का ध्वजारोहण किया गया ना कि उसे फहराया गया…| अर्थात उसे रस्सी के सहारे के नीचे से ऊपर चढ़ा कर फिर गांठ खोलकर फहराया गया… यह पहली बार हुआ, इसे ध्वजारोहण (Flag hoisting )कहते हैं 15 अगस्त 1947 से पूर्व राष्ट्रीय प्रतीकों सांस्कृतिक महत्व की इमारतों पर अंग्रेजों का यूनियन जैक लगा होता था उसे हटाकर भारतीय तिरंगे को लगाया गया | आजादी के 3 वर्ष पश्चात ही भारत गणतंत्रआत्मक देश बन गया 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ| उस दिन तिरंगे झंडे को जो पहले से ही पोल के ऊपर बंधा रहता है गांठ बांधकर खोलकर हवा में लहराए जाता है इसे ध्वज फहराना( Flag unfurling )कहते हैं… गणतंत्र दिवस पर झंडे को फहराया जाता है|

हम राष्ट्रीय पर्व को जब अनुशासन व नियमों में बांधकर मनाते हैं हमारे जिम्मेदार जागरूक नागरिक होने का पता चलता है| राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी परंपराओं प्रथाओं सेरेमनी को उसी आदर्श प्रोटोकॉल के हिसाब से मनाना चाहिए यह अनुशासित नागरिकों का ही पर्व है जो राष्ट्रीय भावना प्रतीकों के महत्व को समझते हैं |

लेकिन आज सोशल मीडिया पर अधिकांश स्वतंत्र दिवस से जुड़े हुए कार्यक्रमों को देखकर मुझे बहुत ठेस पहुंची है स्वतंत्र दिवस पर भी अधिकांश सोसाइटी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों सामाजिक सांस्कृतिक शैक्षणिक गैर शैक्षणिक संस्थाओं में मैंने देखा है झंडे को फहराया गया है जो कि नितांत आपत्तिजनक national flag code अतिक्रमण है , नियम अनुसार आज के दिन दिन तिरंगे झंडे का ध्वजारोहण किया जाना चाहिए| हमने जो देखा उनमें से अधिकांश किसी के भी द्वारा ध्वजारोहण नहीं हुआ जो आज के ऐतिहासिक दिन होना चाहिए| ध्वजारोहण कोई रॉकेट साइंस नहीं है, फिर भी नहीं करते लोग, ऐसे में कैसे आत्मनिर्भर भारत बनेगा|

ध्वजारोहण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना ध्वज +आरोहण अर्थात झंडे के नीचे से ऊपर की ओर चढ़ना फिर उसका हवा में लहराना|

गणतंत्र दिवस के दिन झंडे को गांठ बांधकर फहराया जाता है जो पहले से ही बांस बल्ली या किसी छड़ स्तंभ के शीर्ष पर मौजूद रहता है… राष्ट्रीय ध्वज को चेंज भी कर दिया जाता है, पुराने ध्वज के स्थान पर नवीन ध्वज को लगाया जाता है|

*आर्य सागर खारी* ✍✍✍

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