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इतिहास के पन्नों से डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

संसार का विनाश और विश्व नेता

इतिहास की पड़ताल पुस्तक से …

बेशक चाहे दुनिया का आम आदमी अपनी दैनिक जीवन चर्या को खींचने के लिए कितनी ही बड़ी जंग क्यों न लड़ रहा हो और चाहे उसे वैश्विक राजनीति से अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितनी ही अपेक्षाएँ क्यों न हों? पर वैश्विक राजनीति के पंच या तथाकथित बड़े नेता संसार के आम आदमी की ओर न देखकर किसी दूसरी ओर देख रहे हैं। निश्चित रूप से दुनिया का आम आदमी जहाँ इस समय विकास चाह रहा है, शांति और भाईचारे की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं वैश्विक राजनीति संसार को विनाश की ओर धकेलने की निंदनीय कोशिशें करते दिखाई दे रही है।

हर शाख पे उल्लू बैठा है कहने की आवश्यकता नहीं है कि अंजामे गुलिस्ताँ क्या होगा? क्योंकि इन लोगों के हाथ परमाणु शक्ति लगी हुई है, जिससे वह आज चाहे एक-दूसरे को नाटक करते हुए डराने की कोशिश कर रहे हों, पर कल जब इनका प्रयोग करेंगे तो निश्चित रूप से संसार विनाश की भट्टी में धकेल दिया गया होगा। दुख इस बात का है कि जब दुनिया इनकी परमाणु भट्टी में जल रही होगी तब भी ये राक्षस बाँसुरी बजा रहे होंगे।

संसार के लिए यह बहुत ही खतरनाक संकेत या सूचना है कि यूक्रेन सीमा के पास रूस ने अपना सैन्य जमावड़ा एक सप्ताह में बढ़ा दिया है। उसने यूरोप से लगे यूक्रेन को चारों तरफ से घेर लिया है। जर्मनी की अपील के बाद भी रूस ने डोनबास के वोरोनेक और क्रासनोडर में तैनात की गई तोपों को पीछे नहीं किया है। इसके चलते यूरोप में हाई अलर्ट जैसे हालात हैं। उधर, अमेरिका ने भी काला सागर में अपने दो जंगी जहाज भेजने की तैयारी कर ली है।

जो लोग इनं गतिविधियों को देख रहे हैं या किसी भी प्रकार से इनसे जुड़े हुए हैं उनके दिलों की धड़कनें बढ़ गई हैं। क्योंकि वह इन सारी तैयारियों का अंजाम आराम से जान सकते हैं। जब अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन हुआ था तो लगा था कि शायद ओबामा के जाने के बाद नए राष्ट्रपति कुछ ऐसी पहल करेंगे जिससे विश्व शांति की दिशा में ठोस कार्य हो पाएगा, परंतु सच्चाई यह है कि अमेरिका के खुफिया समूह द कंफ्लिक्ट इंटेलिजेंस के एक विश्लेषण के मुताबिक, क्षेत्र में साइबेरिया की तरफ से दूर से आने वाले सैन्य वाहनों के काफिले तेजी से बढ़े हैं। रूस ने पूर्वी डोनबास के वोरोनेक और क्रासनोडर में हजारों सैनिक टैंक और मिसाइलें तैनात कर दी हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रूसी समर्थकों वाले डोनेट्रक और लुहान्स्क क्षेत्र में भी रूस ने विद्रोह भड़काने की तैयारी कर रखी है। ऐसी खबरें बता रही हैं कि उन्माद अपने चरम पर है और विश्व समाज जिस इस्लामिक उग्रवाद से लड़ने की डींगें मारता है वह इस समय नेताओं के राजनीतिक उन्माद और उग्रवाद का भी शिकार हो चुका है।

बीमारी भयानक है और इस बीमारी के बारे में यह भी समझ लेना चाहिए कि इस्लामिक आतंकवाद का तो कोई उपाय हो सकता है पर इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हो सकता, यह तो ‘स्वाहा’ करके ही दम लेगी। बड़े-बड़े भस्मासुर बड़ी-बड़ी हस्तियाँ बनकर हमारे बीच में बैठे हैं और इस भ्रम में हमारे द्वारा ही पूजे व पूछे भी जा रहे हैं कि ये वर्तमान संसार की सबसे बड़ी शख्सियत होने के कारण एक मसीहा के रूप में हमारे बीच में हैं। जबकि सच्चाई यह है कि ये ‘मसीहा’ न होकर भस्मासुर बन चुके हैं।

सैटेलाइट व सोशल मीडिया में आई तस्वीरें बताती हैं कि पूरे विवादित इलाके में रूस ने यूक्रेन को घेर लिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने भी सीमाई क्षेत्रों का दौरा भी किया। उधर, रूसी संसद के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि पूर्वी यूक्रेन में हालात ‘बेहद अस्थिर’ हैं। उन्होंने चेताया, क्षेत्र में यूक्रेन को लेकर जिस तरह की कार्रवाई चल रही है उससे ‘युद्ध’ का खतरा बढ़ रहा है।

पूर्वी यूरोप के जिस विवादित क्षेत्र (डोनबास) में रूस ने सेना तैनात की है वहाँ 2014 से रूसी समर्थक अलगाववादियों का कब्जा है। रूस इसका लाभ उठाकर क्षेत्र में सैन्य घेराबंदी कर रहा है। यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका ने इस घेराबंदी पर चिंता जताई है। जर्मनी ने कहा है कि वह रूस के खिलाफ नाटो देशों की हर कार्रवाई का समर्थन करेगा।

रूसी राजनयिकों ने जो बयान दिए हैं वह आग में घी डालेने वाले हैं। रूसी राष्ट्रपति के शीर्ष सहयोगी दमित्री पेस्कोव ने कहा, यूक्रेन द्वारा क्षेत्र के रूसी नागरिकों पर किया कोई भी अत्याचार ‘यूक्रेन के अंत की शुरुआत’ होगी। ब्लादिमीर पुतिन के उप प्रमुख दमित्री कोजाक ने कहा, मॉस्को पहले कार्रवाई नहीं करेगा, लेकिन यदि कीव ने कोई कदम उठाया तो इसकी प्रतिक्रिया पैर पर नहीं, मुँह पर गोली मारकर दी जाएगी।

अमेरिका ने अपने जंगी जहाज बोसफोरस के रास्ते भेजने के लिए तुर्की से अनुमति मांगी है। तुर्की ने पुष्टि की है कि अमेरिका के जहाज 14 और 15 अप्रैल को इस समुद्री रास्ते से गुजरेंगे। क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों के आने के बाद यहाँ तनाव और बढ़ने की आशंका है। इस बीच, यूक्रेन ने भी नाटो में शामिल होने की कोशिशें बढ़ा दी हैं। अमेरिका इसके समर्थन में है जबकि रूस भड़क रहा है।

अमेरिका ने पूर्वी यूक्रेन में आक्रामक कार्रवाई करने पर रूस को नतीजे भुगतने के लिए चेताया है। उसने कहा, बाइडन प्रशासन इस संबंध में रूस के खिलाफ अपनी नीति की समीक्षा कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि अमेरिका रूसी सैनिकों के यूक्रेन की तरफ बढ़ने के मामले पर क्षेत्र में अपने साझेदारों और सहयोगियों से वार्ता कर रहा है। साकी ने कहा, यूक्रेन पर कार्रवाई के परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इनमें से कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ अप्रत्यक्ष होंगे।

प्राचीन भारत में भौतिक विज्ञान पर नियंत्रण रखने के लिए आध्यात्मिक विज्ञान का सहारा लिया जाता था। बड़े-बड़े ऋषि महात्मा आध्यात्मिक शक्तियों को अपने नियंत्रण में रखकर उन्हीं के बल पर भौतिक विज्ञान पर नियंत्रण रखते थे और संसार को चलाने वाले क्षत्रिय वर्ग के छात्रों पर अपनी आध्यात्मिक शक्तियों के माध्यम से नियंत्रण रखकर उन्हें वेदानुकूल, धर्मानुकूल और मानवता के हित में निर्णय लेने के लिए विवश किया करते थे। कहीं पर भी भौतिक विज्ञान का दुरुपयोग न हो इस बात पर पूरी चौकसी बरता करते थे। जबकि आज का संसार आध्यात्मिक शक्तियों को बेकार की चीजें समझ कर उस ओर देखना भी नहीं चाहता। भौतिक विज्ञान के नशे में चूर लोग सत्ता शीर्ष पर पहुँच जाते हैं और फिर सत्ता मद में उसी प्रकार इतराते हैं जैसे एक साधारण व्यक्ति धन पद पाकर इतराने लगता है और समाज के अन्य लोगों पर अपनी दादागिरी करने लगता है।

राजनीति दादागिरी करने के लिए नहीं खोजी गई थी यह तो समाज के शांतिप्रिय लोगों पर धन पद पाकर उन पर दादागिरी दिखाने वाले लोगों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए खोजी गई थी। यदि राजनीति आज अपने धर्म को भूल रही है तो समझ लीजिए कि संसार का विनाश निकट है।

संसार के तथाकथित सज्जन व शांतिप्रिय लोग अपनी रोजी-रोटी की चिंता में लगे रहेंगे और इस भूल व भ्रांति को पाले रहेंगे कि उनके नेता उन्हें किसी भी प्रकार की आपदा से बचा लेंगे। जब उनकी आँखें खुलेंगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी और संभवतः इस बात को तो लिखने वाला भी कोई नहीं रहे कि जिन पर भरोसा किया गया था उन्होंने ही आशियाने को आग लगा दी। विनाश काले विपरीत बुद्धि।

पश्चिमी लोगों को अपना आदर्श मानकर उनका अंधानुकरण करने वाले भारत के लोगों को भी यह बात समझ लेनी चाहिए कि आज की दुनिया के विनाश की तैयारियाँ वही कर रहे हैं जो उनकी नजरों में सभ्य समाज के सभ्य लोग हैं।

कोई भी राष्ट्रपति आए वह नई बोतल में पुरानी शराब ही होता है।

क्रमशः

– डॉ राकेश कुमार आर्य

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