Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक सम्पत्ति -253 *वेदमंत्रों के उपदेश*

(यह लेखमाला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की ‘वैदिक सम्पत्ति’ नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।)

प्रस्तुति देवेंद्र सिंह आर्य
चेयरमेन उगता भारत

गतांक से आगे ..

             यद्यपि संसार में सभी प्राणियों को अर्थ की आवश्यकता है, पर मनुष्य की अर्थसम्बन्धी आवश्यकता अन्य प्राणियों की अपेक्षा बहुत ही विलक्षण है। संसार में देखा जाता है कि मनुष्य के अतिरिक्त जितने प्राणी है, उन सबका अर्थ केवल आहार और घर तक ही सीमित है। उनको आहार और घर के अतिरिक्त शरीर रक्षा से सम्बन्ध रखनेवाले अन्य किसी भी अर्थ की आवश्यकता नहीं होती। बहुत से प्राणियों को तो आहार के अतिरिक्त घर की भी आवश्यकता नहीं होती, पर मनुष्य का अर्थ चार भागों में विभाजित है। इन चारों विभागों के नाम भोजन, वस्त्र, गृह और गृहस्थी हैं। संसार में जितने मनुष्य हैं, चाहे वे जंगलों में रहनेवाले कोलभील हों, चाहे फाँस के रहने वाले बड़े बड़े शौकीन हों चाहे राजा और बादशाह हों, और चाहे त्यागी संन्यासी हों, सब को उपर्युक्त चारों प्रकार के अर्थों की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार एक सम्राट् को नाना प्रकार के व्यजनों की, अनेक प्रकार के बहुमूल्य वस्त्रों की, बड़े बड़े राजप्रासादों की और रङ्गमहलों की तथा हजारों प्रकार के बर्तन, फरनीचर, अस्त्र, यान और अनेकों ऐसे ही पदार्थों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार एक त्यागी परिव्राट् को भी भिक्षान, कौपीन, कंदरा और दण्ड-कमण्डलु की आवश्यकता होती है, और जिस प्रकार सम्राट् और परिव्राट् को इनकी आवश्यकता होती है, उसी प्रकार एक अमेरिका के नागरिक से लेकर अफ्रीका के जुलू तक को उक्त चारों पदार्थों की आवश्यकता होती है। इसका यही मतलब है कि संसार के सभी मनुष्यों की आर्थिक आवश्यकताएँ एक ही समान हैं। किंतु देखते हैं कि इस समानता में ही इतनी असमानता विद्यमान है कि जिसका सामञ्जस्य करना बड़ा ही कठिन है। कोई मांस खाकर, कोई फल खाकर, कोई अन्न खाकर और कोई सब कुछ खाकर गुजर कर रहा है। इसी तरह कोई लंगोटी लगाकर, कोई कोट पतलून पहनकर, कोई घोती दुपट्टा पहनकर और कोई तहमत चुगा पहनकर कपड़ों का उपयोग करता है। इसी तरह कहीं के मकान अनेकों मंजिल ऊंचे आसमान से बातें कर रहे हैं और कहीं के मकान तहखानों की भाँति जमीन के नीचे बने हुए पाताल से बातें कर रहे हैं। जो हाल भोजन, वस्त्र, और घरों का है, वही हाल गृहस्थी का भी है। कहीं सोलह सोलह दृङ्क कमीजें, बावन बावन जोड़े जूते, नाना प्रकार की कुसियाँ और अलमारियाँ हैं और कहीं साफ सुथरे कमरों में केवल चटाइयाँ बिछी हैं और थोड़े से खाने पकाने के बर्तन रक्खे हैं। कहने का मतलब यह कि यद्यपि मनुष्यों की आवश्यकताएँ एक ही समान हैं, तथापि उनकी संख्या और प्रकारों में इतना अन्तर और इतनी विषमता है कि जिसको देखकर यह प्रश्न स्वाभाविक ही उपस्थित होता है कि इन सबमें कौनसा प्रकार उत्तम है ? जहाँ तक हमको स्मरण है, इस प्रश्न को आज तक संसार में किसी ने ऐसे ढंग से नहीं सुलझाया, जो संसार की आर्थिक समस्या को हल करते हुए मनुष्य को मोक्षाभिमुखी बना सके ।

किन्तु बड़े गर्व से कहा जा सकता है कि आर्यों ने बड़ी ही खोज के साथ अर्थ से सम्बन्ध रखनेवाले इन चारों विभागों को इस ढंग से सुलझाया है जिसके द्वारा न तो किसी प्राणी को दुःख ही हो सकता है और न अपने आप ही को कष्ट हो सकता है। प्रत्युत संसार की आर्थिक असमानता को नष्ट करके एक ऐसा मार्ग बन जाता है कि जो मनुष्य को लोक और परलोक के सुखों को आसानी से प्राप्त करा सकता है। यही कारण है कि आर्यों ने इस प्रकार के अर्थ को अपनी सभ्यता में प्रधान स्थान दिया है। यहाँ हम अर्थ से सम्बन्ध रखनेवाले उक्त चारों विभागों को क्रम से लिखते हैं और दिखलाते हैं कि आर्यों ने कितनी बुद्धिमत्ता से अर्थ को हल किया है।

आर्यों का भोजन

आर्यों ने अर्थ के प्रधान अङ्ग भोजन अर्थात् आहार की बड़ी ही छानबीन की है। उन्होने आर्य-आहार को धार्मिक और वैज्ञानिक सिद्धान्तों के अनुसार स्थिर किया है। उनका विश्वास था कि ‘ आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्व- शुद्धो ध्रुवा स्मृतिः’ अर्थात् आहार की शुद्धि से सत्त्व की शुद्धि होती है ओर सत्त्व की शुद्धि से स्मरणशक्ति निश्चल होती है, परन्तु अशुद्ध आहार से सत्त्व और स्मृति भी अशुद्ध हो जाती है। यहाँ तक कि अन्नदोष से आयु भी कम हो जाती है। मनु भगवान् स्पष्ट कहते हैं कि ‘ आलस्यादनदोषच्च मृत्युविप्राञ्जिघासति’ अर्थात् आलस्य और अन्नदोष से मनुष्य शीघ्र मर जाता है। इसलिए जो आहार आयु बल, रूप, कान्ति और मेघा की वृद्धि करनेवाला हो. वही आर्यों का भोजन हो सकता है। इतना ही नहीं प्रत्युत जिस भोजन के संग्रह करने में अर्थ के पाँचों नियमों की अनुकूलता होती हो, किसी भी प्राणी की आयु और भोगों में विघ्न न पड़ता हो और आयु, बल, रूप और मेघा के साथ साथ मोक्ष प्राप्त करने से भी सहायता मिलती हो, वही आहार आर्यों का भोजन हो सकता है। अर्थात् आर्य-भोजन चार कसौटियों से कसा होना चाहिए। पहिली कसौटी यह है कि जिस आहार से आयु, बल, कान्ति ओर बुद्धि की वृद्धि होती हो। दूसरी कसौटी यह है कि जिस के प्राप्त करने में किसी को कष्ट न हो अर्थात् किसी प्राणी की आयु और भोगों में विघ्न उत्पन्न न हो। तीसरी कसौटी यह है कि जो आहार विना किसी कष्ट के केवल अपने ही अग्रर्हित कर्मों से उत्पन्न हुआ हो और चौथी कसौटी यह है कि जो आहार मोक्ष प्राप्त करने में सहायक हो, वही आर्यों का भोजन हो सकता है, अन्य नहीं।
क्रमशः

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
betyap giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım Merkezleri
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
norabahis giriş
norabahis giriş
medusabahis giriş
Hititbet Giriş
medusabahis giriş
medusabahis giriş
medusabahis giriş
betyap giriş
betyap giriş
betmoon giriş
betmoon giriş
betyap giriş
betyap giriş
kingroyal giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
artemisbet
kralbet
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
otobet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
xslot giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
xslot giriş
otobet giriş
otobet giriş
otobet giriş
betyap giriş
betyap giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
betnano
betnano
betnano
betpark giriş
hititbet
sahabet
hititbet
kralbet
kralbet
kralbet
sahabet
setrabet
setrabet
kralbet