199 चंदन को ज्यों ज्यों घिसें, सुगंधि बढ़ती जाय । सोने से कुंदन बने, कीमत बढ़ती जाय।। कीमत बढ़ती जाय , ईख से रस भी निकले। चमक बढ़े तप से सदा,जाने जो इस पथ चले।। तपता चल, जपता चल, बन जा तू भी कुंदन। मूल्यवान बन जा तू इतना, लोग बना लें चंदन।। 200 पागल […]
अध्याय … 67 आई और आकर गई ,……