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विशेष संपादकीय

”सत्य का समानार्थक अन्य कोई शब्द नही’

हिन्दी के कई शब्द ऐसे हैं जिनके समानार्थक शब्द किसी भी भाषा के पास उपलब्ध नही हैं। उनमें से एक शब्द ‘सत्य’ है। यह शब्द संस्कृत के सत्यम् से बना है। सत्यम् की सन्धि विच्छेद करने पर हमें यह शब्द स+ति+यम् से मिलकर बनता हुआ स्पष्ट होता है। इसमें वैयाकरणिक आधार पर ‘स’ का अर्थ […]

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विशेष संपादकीय वैदिक संपत्ति

मनुष्य का आदिम ज्ञान और भाषा-9

गतांक से आगे….इस व्याकुलता को सांड, भैंसा, बकरा आदि तुरंत ही मालूम कर लेते हैं और गर्भ स्थापन कर देते हैं। जिन मादा पशुओं को आवश्यकता नही है, उनके नर उनकी ओर दृष्टिपात भी नही करते। किंतु मनुष्य में यह बात बिलकुल नही पाई जाती। न तो ऋतुमती स्त्री को ही कोई विलक्षण व्याकुलता होती […]

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विशेष संपादकीय

भारत की समस्या क्या है?

भारत की वास्तविक समस्या अशिक्षित समाज नही है जैसा कि कह दिया जाता है। वास्तव में भारत की वास्तविक समस्या शिक्षित समाज है। समस्या का निरूपण क्योंकि यह शिक्षित समाज करता है, इसलिए यह चोरी स्वयं करता है और कानून में दूसरों को फंसाता है। यह है इसकी शिक्षा का चमत्कार। वैसे हमारी व्यवस्था का […]

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विशेष संपादकीय वैदिक संपत्ति

मनुष्य का आदिम ज्ञान और भाषा-8

गतांक से आगे….आगामी धर्मसंसार में फेले हुए समस्त मतमतांतरों की आलोचना करता हुआ, एक विद्वान नामी पुस्तक में कहता है कि आगामी धर्म वैदिक धर्म ही होगा। अब संसार ईमान के दुर्ग से निकलकर बुद्घि और तर्क की ओर चल रहा है। जब तक मजहबी सिद्घांत को तत्वज्ञान पुष्ट न करे, तब तक वह स्थिर […]

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विशेष संपादकीय

थालियों और तालियों का बजना

उत्तर प्रदेश आजादी के बाद से ही देश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने वाला प्रांत रहा है। उत्तराखण्ड बनने तक प्रदेश के पास 85 लोकसभा सीटें होती थीं। आज भी इन सीटों में अधिक अंतर नही आया है। 82 सीटें अकेले उत्तर प्रदेश के पास आज भी हैं। इतनी सीटें किसी भी प्रांत के […]

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विशेष संपादकीय वैदिक संपत्ति

मनुष्य का आदिम ज्ञान और भाषा-7

गतांक से आगे….अहिंसा जहां दूसरों को सताना मारना मना करती है, वहां स्वयं दीर्घ जीवन प्राप्त करने की ओर भी प्रेरणा करती है। दीर्घ जीवन प्राप्त करने का सबसे बड़ा साधन प्राणायाम है। योरप में प्राणायाम का प्रचार बढ़ रहा है। डॉक्टर ‘मे’ कहते हैं कि जिससे हम स्वांस लेते हेँ, उसी वायु पर हमारा […]

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विशेष संपादकीय

गणतंत्र के ये अहम सवाल

भारत एक बार फिर अपना गणतंत्र दिवस मना रहा है। 1950 की 26 जनवरी से हम अपना यह पवित्र राष्ट्रीय पर्व मनाते आ रहे हैं। यह वह दिवस है जिसे प्राप्त करने के लिए भारत ने सैकड़ों वर्ष का संघर्ष किया। जब पहला विदेशी आक्रांता यहां आया, उसी दिन से उसे बाहर निकालने की लड़ाई […]

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विशेष संपादकीय वैदिक संपत्ति

मनुष्य का आदिम ज्ञान और भाषा-7

गतांक से आगे….नौकरों की हालत इस विज्ञापन से ज्ञात हो जाती है और पता लग जाता है कि नौकरों की कितनी खुशामद करनी पड़ती है। इस वर्णन से स्पष्ट हो रहा है कि अब नौकरों के द्वारा विलास की वृद्घि नही की जा सकती। यह तो नौकरों का हाल हुआ। अब जरा कारखानों के बारे […]

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विशेष संपादकीय

‘नीरो’ का बांसुरीवादन

अथर्ववेद (3/4/2) में आया है :-ततो न उग्रो विभजा वसूनि।यहां राजा से उसकी प्रजा कह रही है कि तू तेजस्वी होकर हमारे लिए धन का समुचित और यथोचित विभाग कर, अर्थात हमारे खान-पान, ज्ञान-विज्ञान, परिधान आदि के लिए जितना-जितना जिसके लिए आवश्यक है, उतना-उतना उसे दे।वेद का यह मंत्र स्पष्ट कर रहा है कि राष्ट्र […]

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विशेष संपादकीय वैदिक संपत्ति

मनुष्य का आदिम ज्ञान और भाषा-6

गतांक स आग….अनुभवी लोग कहत हैं कि कृत्रिम साधनों क उपयोग स स्त्रियों को कंसर आदि रोग हो जात हैं। स्त्रियों क कोमल स कोमल मज्जातंतुओं पर इन कृत्रिम साधनों का बहुत खराब असर होता है, जिसस अनकों रोग उत्पन्न होत हैं। बहुत स प्रतिष्ठित डॉक्टरों का कहना है कि इन कृत्रिम साधनों क कारण […]

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