ज़मीन पर चाहे जो भी स्थिति हो, लिबरलों के गिरोह विशेष का का पूरा जोर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपने अनुरूप माहौल बनाने का रहता है। वो चाहते हैं कि देश के 0.045% क्षेत्र के कुछ हिस्से में हुए विरोध-प्रदर्शन को यूँ दिखाया जा रहा है जैसे कि पूरा देश सुलग रहा हो। अमेरिका के राष्ट्रपति […]
Category: भयानक राजनीतिक षडयंत्र
प्रमोद भार्गव कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ बयान देने के बाद मध्य-प्रदेश से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। दरअसल सिंधिया ने टीकमगढ़ दौरे के समय अतिथि शिक्षकों को नियमित करने के सिलसिले में बयान दिया था कि यदि कांग्रेस वचन-पत्र में शामिल इस बयान को जल्द […]
प्रमोद भार्गव कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ बयान देने के बाद मध्य-प्रदेश से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। दरअसल सिंधिया ने टीकमगढ़ दौरे के समय अतिथि शिक्षकों को नियमित करने के सिलसिले में बयान दिया था कि यदि कांग्रेस वचन-पत्र में शामिल इस बयान को जल्द […]
आरबीएल निगम ( वरिष्ठ पत्रकार ) केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। उनकी पुस्तक लॉन्च होने के बाद केरल के चर्चों में हड़कंप मचनी तय है क्योंकि इसमें पादरियों के कुकर्मों को लेकर कई खुलासे होंगे। सिस्टर लूसी के बारे में बता दें कि इन्होंने ही बलात्कार आरोपित पादरी फ्रैंको […]
केके मुहम्मद अयोध्या के स्वामित्व के संबंध में 1990 में राष्ट्रीय स्तर पर बहस ने जोर पकड़ा। इसके पहले 1976- 77 में पुरातात्विक अध्ययन के दौरान अयोध्या उत्खनन में भाग लेने का मुझे अवसर मिला। प्रो बीबी लाल के नेतृत्व में अयोध्या उत्खनन की टीम में ‘दिल्ली स्कूल ऑफ आर्कियोलॉजी’ के 12 छात्रों में से […]
आज राष्ट्र के समक्ष विभिन्न ज्वलंत समस्याएं हैं। देश में सर्वत्र अराजकता की सी स्थिति है। राजनीतिज्ञ धर्महीन, धर्मनिरपेक्ष होकर पथभ्रष्ट हो गये हैं। लोगों का राजनीति और राजनीतिज्ञों से विश्वास भंग हो चुका है, क्योंकि राजनीति और राजनीतिज्ञ आज व्यक्ति का शोषण कर रहे हैं और अधिकारों का दोहन कर रहे हैं। जबकि उनसे […]
भारत के राजनैतिक नेतृत्व से ऐसी अपेक्षा की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उसे तो वोटों की राजनीति करनी है। मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे और चर्च में जाकर उन्हीं की पोशाक पहनना और उन्हीं की बोली बोलना आज हमारे इन राजनीतिज्ञों का शगुन हो गया है। इन धर्महीनों से राष्ट्रधर्म पालन करने की अपेक्षा करना बेमानी है। […]
राष्ट्र भाषा हिन्दी की दुर्गति, भाग-3 भारत में संविधान के अंदर एक दर्जन से भी अधिक भारतीय भाषाओं को मान्यता प्रदान कर दी गयी है। यदि राजभाषा हिंदी अपने सही ढंग से उन्नति करती और उसकी उन्नति पर हमारी सरकारें (केन्द्रीय और प्रांतीय दोनों) ध्यान देतीं तो आज जो क्षेत्रीय भाषाई लोग अपनी-अपनी भाषाओं को […]
जिस देश की अपनी कोई भाषा नहीं होती- वह बैसाखियों पर चलता है। ऐसे देश की स्वाधीनता उधार होती है, उसकी आस्थायें उधार होती हैं, उसकी मान्यतायें और परम्परायें भी उधार होती हैं। जब ऐसी परिस्थितियां किसी देश के समाज में बन जाया करती हैं तब इस देश का सांस्कृतिक पतन होने लगता है। आज […]
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का स्तर दिया गया। हिंदी को ही राजभाषा भी माना गया। संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार हिंदी भारत की राजभाषा तथा देवनागरी इसकी लिपि है। यह दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि व्यवहार में हमारा यह संवैधानिक अनुच्छेद हमारा राष्ट्रीय संकल्प न बनकर केवल कागज का […]