सूर्य जगाय रहे जग को उठ रैन गई अब सोवत क्यों? जाग गये सब फूल कली तुम सोकर स्वप्न पिरोवत क्यों? शक्ति अपार भुजा में भरी प्रण आप करो अपने हिय से। काज धरा पर हैं जितने सब आन बने निज निश्चय से।। प्रात हुआ यहि कारण की निशि के सपने सब पूर्ण करो। […]
सूर्य पुकार सुनो