नोट―यह उपदेश सभी स्त्रियों के लिए बहुत प्रेरक उपदेश है, आचरण में लायें। देवो मनुष्यो गन्धर्वो युवा चापि स्वलंकृत: । द्रव्यवानभिरुपोवा न मेऽन्य: पुरुषोमत: ।। भावार्थ― देवता, मनुष्य, गन्धर्व, युवक अच्छी सज धज वाला धनवान अथवा परम सुन्दर कैसा ही पुरुष क्यों न हो, मेरा मन भर्ता (पति) को छोड़कर कहीं नहीं जाता। दुर्व्याह्रताच्छंकमाना दु:स्थिताद् […]